यूट्यूब चैनल पर स्कूल की गतिविधियों को देख राजस्थान से आया ” क्राफ्ट कला ‘” सीखानें कृष्णा राव नयापुरा माकनी के सरकारी स्कूल

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नागदा (धार ) |

यूट्यूब चैनल पर शासकीय नवीन प्रावि नयापुरा माकनी की गतिविधियों से प्रभावित होकर सोजतरोड पाली (राजस्थान ) से इंडियन पेपर कटिंग आर्ट के कृष्णा राव ने शाला में आकर बच्चों को अनुपयोगी वस्तुओं से क्राफ्ट कला (हस्तकला ) के माध्यम से साज-सज्जा की वस्तुएं बनाना सीखाया । बच्चों ने भी अपने हाथों से इस कला से कई सामग्री बनाकर भी बताया । इस अवसर पर आकस्मिक निरीक्षण पर आएं अधिकारीगणों द्वारा भी इस शून्य निवेश नवाचारी उपयोगी गतिविधि हस्तकला कौशल की प्रशंसा की । प्रधानाध्यापक गोपाल कौशल ने कहा कि क्राफ्ट जैसी कलाओं से बच्चों में मानसिक एवं बौद्धिक दक्षता का विकास होता हैं ।
श्री कृष्णाराव ने बच्चों को कई सामग्री बनाना सिखाई जिसमें जैसे क्रिसमस पेड,रंगोली,फूल,आदि । श्री कृष्णा ने अपनी ओर से पेंसिल ड्राईंग बुक एवं न्यू एक्सप्रियंस आर्ट (समाज उपयोगी उत्पादन कार्य ) नि:शुल्क भेंट की , उपहार, कला पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठें |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।