पुस्तक समीक्षा : कशिश

0 0
Read Time2 Minute, 56 Second

पुस्तक समीक्षा : कशिश

kashish

प्रेम की कविताएं,भाषा की शुद्धता, रस की गहरी समझ, और बतौर हिन्दी को विद्यार्थियों को पढ़ाने के चलते लेखक की रचनाधर्मिता उनके लेखन में दिखाई देती है। उनकी नज़्म ‘बहारें’ से शुरुआत होती पुस्तक कशिश में लेखक ने अपने प्रिय के इन्तजार को दर्शाया है। इसके बाद ‘दास्तां ए मोहब्बत’ में इश्क लिखा है। ‘शब्दांजलि’ के माध्यम से वतन की बात की है। ‘तिलिस्म ए चाहत’ में जहाँ प्रेम लिखा है वही स्वदेश प्रेम को दर्शाते हुए विंग कमांडर अभिनंदन के स्वदेश आगमन पर ‘घर वापसी’ लिखी है, जो बेहतरीन भावना प्रधान रचना है । ‘रस्म’ में प्रेम को दर्शाया और ‘होली का हुड़दंग ( घनाक्षरी छंद )’ के माध्यम से लेखक ने भारत के त्यौहार के बारे में बेहतरीन वर्णन है। ‘बदलते मौसम’ के माध्यम से लेखक ने इश्केदारियां बताई है। ‘ये कैसी आज़ादी’, ‘ख़ुशबू’, ‘याद आते हो’, ‘ओस की बूंदें’, ‘मतदान – लोकतंत्र में पुण्यदान’, ‘गुरु की महिमा’ ‘रिहाई’ आदि कविताएं भी बेहतरीन है। ‘क़शिश’  के माध्यम से  रचनाकार ने मूल प्रेम की व्याख्या की है। इस पुस्तक में प्रकाशक ने जो नया प्रयोग किया है जिसमें  लेखक की पूर्व प्रकाशित पुस्तकों पर पाठकों की प्रतिक्रियाओं को सम्मिलित करके पाठकों को भी यथोचित मान दिया है, जो काबिल ए तारीफ है। कविताओं के बीच छोटी क्षणिकाएं या कहें काव्य पुष्पों का संयोजन, सुन्दर आवरण,  गुणवत्ता युक्त पृष्ठ और अशुद्धिरहित और पाठशोधित मुद्रण संस्मय प्रकाशन के कार्यों की गुणवत्ता प्रदर्शित करती है। लेखक ने जहाँ प्रेम की सुन्दर व्याख्या की है वही प्रकाशक ने उसी बखूबी खूबसूरती से पुस्तक को प्रकाशित करके अपने दायित्व का निर्वाह किया है। पाठकों को यह पुस्तक जरूर पढ़ना चाहिए।

पुस्तक:  कशिश

लेखक: वासिफ काज़ी

कीमत: 50 रूपए (पेपरबैक)

पृष्ठ: 48 पृष्ठ

प्रकाशक: संस्मय प्रकाशन, 207 इंदौर प्रेस क्लब, इंदौर, मध्यप्रदेश – 452001

ISBN- 978-81-940450-8-3

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

स्तक समीक्षा : कशिश

Sat Jun 22 , 2019
प्रेम की कविताएं,भाषा की शुद्धता, रस की गहरी समझ, और बतौर हिन्दी को विद्यार्थियों को पढ़ाने के चलते लेखक की रचनाधर्मिता उनके लेखन में दिखाई देती है। उनकी नज़्म ‘बहारें’ से शुरुआत होती पुस्तक कशिश में लेखक ने अपने प्रिय के इन्तजार को दर्शाया है। इसके बाद ‘दास्तां ए मोहब्बत’ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।