हिंदी के प्रचार प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका

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ritu devi
” हम सब की जान है हिन्दी।
हिन्दुस्तान देश की पहचान है हिन्दी
मस्तक पर शोभे चमकती बिन्दी बनकर हिन्दी
अपनापन की एहसास पहचान है हिन्दी
हिन्द देश की गौरवशाली गाथा की गान है हिन्दी।
हमारे राष्ट्र की जान,प्राण राष्ट्रभाषा हिन्दी गौरवशाली शान की पहचान है।हिन्दी हम हिनदुस्तानियों की राष्ट्रभाषा ही नहीं सबसे प्यारी भाषा है। हिन्दी में अपनेपन का भाव झलकता है।यह भाषा हम सभी को एकता के सूत्र में बाँधे हुए है।
      हिन्दी के संवर्धन एवं संरक्षण में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण भूमिका है।सोशल मीडिया विचार अभिव्यक्ति करने का सशक्त एवं अनूठा माध्यम है। हमें किसी भी भाषा में भाषा में अपने विचार अभिव्यक्ति कर सकते हैं। हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए हम हिन्दुस्तानी सोशल मीडिया के आभारी हैं जिन्होंने इस भाषा को बुलंदी के ऊँचे शिखर तक पहुँचाया है।चाहे दूरदर्शन हो ,कम्प्यूटर हो, लैपटोप हो, आनलाइन समाचार पत्र-पत्रिका, सोशल नेटवर्किंग सभी जगह हिन्दी का बोलबाला है ।
  .   स्वतंत्रता संग्राम की लहर भी हिन्दी समाचार पत्र,पत्रिकाओं के माधयम से उठी थी। समाचार पत्रों में निराला, सुमित्रानंदन  पंत, महादेवी वर्मा , जयशंकर प्रसाद ,हरिवंश राय बच्चन ,सुभद्राकुमारी चौहान, इत्यादि  साहित्यकारों की देशभक्त ओजपूर्ण  रचना प्रकाशित रहती थी।उनके ओजपूर्ण एवं देशभक्ति से ओतप्रोत रचना पढकर भारतीय नींद से जागकर अंग्रेजों को सात समंदर पार भगाने के लिए विजय क्रांति की आगाज कर देते थे।दूरदर्शन के आ जाने से हिन्दी का प्रचार प्रसार तीव्र गति से हुआ। दिल्ली दूरदर्शन पर हिन्दी के कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता रहा है।इस पर हिन्दी साहित्यकारों की जीवनी एवं रचना का प्रसारण होने लगा जिसे देखने एवं समझने की जीजिविषा में भारतीयों सहित विदेशियों में हिन्दी सिखने की ललक जगी। दूरदर्शन पर हिन्दी के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का प्रसारण किया जाता रहा है जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया।
शरतचंद्र की कहानियों का भी प्रसारण दूरदर्शन पर होता है। इनके द्वारा लिखित उपन्यास चरित्रहीन पर आधारित धारावाहिक सबका मन मोह लिया तथा हिन्दी उपन्यास पढने  की इच्छा प्रबल हूई।इसी तरह अनेकों ही
हिन्दी  साहित्यकारों की रचना देशप्रेम एवं राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति अनुराग जागृत किया। लगातार हिन्दी के प्रचार प्रसार में दूरदर्शन तत्पर है। दूरदर्शन के हिन्दी चैनल पूरे विश्व में परचम फहरा रहू हैं। सर्वप्रथम विदेशों में भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा दिए गए हिन्दी के भाषण को सभी चैनलों ने प्रमुखता से प्रसारित करता रहा।इससे भारतीयों में हिन्दी के प्रति आस्था उत्पन्न हुई।विदेशों में रहने वाले भारतीय भी हिन्दी सिखने लगे।दूरदर्शन पर क्रिकेट मैच के दौरान हिन्दी कमेंटेटरी सभी को बहुत भाती है।सभी हिन्दी चैनल को बहुत सराया जा रहा है। हिन्दवासी इन सबसे बहुत लगाव रखते हैं। हिन्दी धारावाहिक देखना परिवार के सदस्यों संग बहुत रमणीय लगता है।सभी कोई पसंदीदा हिन्दी धारावाहिकों का बेसब्री से इंतजार करते हैं ।आकाशवाणी का भी हिन्दी के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब कम टी०वी० थे तो रेडियो के कार्यक्रम सभी को आपस में बाँधे रहते थे।’सयानी’ जी का हिन्दी विनाका संगीत माला कार्यक्रम के सभी भारतीयों सहित प्रवासी भारतीय एवं अन्य मुल्क के लोग भी दीवाने थे।यू.एस. ए . में हिन्दी की पढाई होने लगी है।दूरदर्शन, सोशल नेटवर्किंग पर हिन्दी सिनेमा का घर बैठे सुविधापूर्वक आनंद सपरिवार लेते हैं।इसके कारण भी हिन्दी ऊँचाइयों को छू रही है।हिन्दी भाषा का क्रेज इतना बढ गया है कि अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं की फिल्मों का हिन्दी डबिंग कर दर्शकों के समक्ष सोशल मीडिया पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
    कम्प्यूटर, सोशल नेटवर्किंग भी हिन्दी के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कम्प्यूटर पर हिन्दी टंकण का आविष्कार हिन्दी भाषियों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब आसानी से हिन्दी के जानकार भी हिन्दी में टंकण कर कार्य कर लेते हैं।इससे कार्य प्रणाली आसान है गयी है। घर बैठे सारे कार्य आसानी से हो जा रहे हैं।इसके माध्यम से विचारों का आदान प्रदान आसानी से हो रहा है। मोबाइल में भी हिन्दी टंकण हिन्दी के प्रचार प्रसार में युगांतरकारी क्रांति लाया है। साधारण लिखे -पढे भी हिन्दी में टंकण करके अपने विचारों को प्रेषित करते हैं। आनराइड मोबाइल चलाने के लिए सभी लोगों में हिन्दी सिखने की ललक में वृद्धि हुई है।अब सभी सारे न्यूज क्षण में जानना चाहते हैं।मोबाइल में हिन्दी टंकण कर सभी मिनटों में जान सकते हैं।परीक्षा परिणाम हो , देश-विदेश का समाचार इत्यादि हिन्दी में वेबसाइट को स्क्रीन पर टंकण कर जट से खोलकर सभी समाचारों से अवगत हो जाते हैं। दूर बैठे अपने घरों में माता-पिता से भी बच्चे हिन्दी में चेटिंग कर आसानी से बातें कर लेते हैं।इस कारण साक्षरता अभियान की मुहिम जोर पकड़ ली है। सभी हिन्दी भलीभाँति सीख रहे हैं।मोबाइल  पर हिन्दी की गुणवत्ता सबसे अधिक परिलक्षित होती है। इस कारण सभी सिखने के लिए तत्पर हैं । प्रवासी भारतीय भी हिन्दी भाषा को सिख रहे हैं ताकि बातों का माध्यम बन सके। भारतीयों की साधारण बस्ती में जाकर कल्याण की बात कर सके। आनलाइन हिन्दी कवि सम्मेलन ,हिन्दी  कहानी प्रतियोगिता, कविता लेखनी , गजल, हायकू,मुक्तक इत्यादि विधाओं की प्रतियोगिता होने से हिन्दी के प्रति साहित्यकारों का रूझान पैदा  हुआ है। नव साहित्यकार आनलाइन ही हिन्दी की नवीन विधा से अवगत होकर सिख रहे हैं।नवीन रचनाओं का सृजन हो रहा है। दिन प्रतिदिन हिन्दी का विकास हो रहा है। मोबाइल पर ही हिन्दी पत्र,पत्रिका, साहित्यकारों की किताबें पढकर हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में रूचि लेकर हिन्दी भाषा का विकास कर रहे हैं। सबसे अधिक सोशल मीडिया के अंतर्गत हिन्दी का प्रचार प्रसार मोबाइल नेटवर्किंग से हुआ है।  इस कारण से हिन्दी से   पढाई कर ऊँचे पद को सुशो भित कर रहे हैं। हिन्दी छात्रों एवं प्राध्यापकों में आशातीत वृद्धि हुई है। इस तरह हम निराला, दिनकर, गोपाल सिंह नेपाली, महादेवी वर्मा के सपनों को सोशल मीडिया के माध्यम से  साकार कर लेंगे। हमें चाहिए कि हिन्दी के विधाओं से अवगत होकर इसकी शुद्धता पर ध्यान देकर प्रगति पथ पर आगे बढते चले।तभी तो किसी कवि ने कहा है:-
“दो कदम तुम चलो,दो कदम हम चलें।”
#रीतु देवी
परिचय- 
रीतु देवी(शिक्षिका)
राजकीय मध्य विद्यालय करजापट्टी
गाँव:-करजापट्टी
प्रखंड:-केवटी
जिला:-दरभंगा,बिहार

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।