धरती माँ 

0 0
Read Time1 Minute, 18 Second
pragya pandey
अपनी धरती माँ के श्रंगार को नहीं उजाड़ना चाहिए ,
हर  इंसान को कम से कम एक पेड़  लगाना चाहिए ।
क्या सदैव देने की  रीत  निभायेगी  प्रकृति ही हमको ,
कुछ कर्तव्य हमको भी धरती माँ के प्रति निभाना चाहिए।
माना  समय  नहीं व्यस्त रहते  हो अपनी ही तरक्की में ,
पर बच्चों के लिए कुछ तो अच्छी विरासत बचाना चाहिए।
स्वच्छ रखो सदैव नदियों को प्रदूषित न होने दो जगको,
फूलों  हरियाली और नदियों से माँ को  सजाना चाहिए।
कहे प्रज्ञा श्रृंगार उजड़ा माँ तो प्रकोप का भागी जग होगा,
बचने केलिए प्रकोप से,माँ को हरियाली से रिझाना चाहिए।
नाम-प्रज्ञा पाण्डेय
साहित्यिक उपनाम-प्रज्ञा पाण्डेय
वर्तमान पता-उन्नाव, उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-उन्नाव
शिक्षा-डबल एम ए (अंग्रेजी साहित्य व इतिहास)
कार्यक्षेत्र-ग्रहणी
विधा -कविता, मुक्तक, ग़ज़ल

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

क्या कहना है किसको ....

Wed Apr 24 , 2019
क्या उसने कहाँ मेरे से, और मैने उसे क्या कहाँ। क्यों सुनने को बेताव है, मेरे मुंह से क्यों वो।। ये शहर कोई नया नही, मेरे आने जाने के लिए। मिलता रहा जहां प्यार, वहां हम आते जाते रहे।। अब तुम ही बता दो मुझे, की क्या कुछ हम कहे। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।