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महापर्व

पूरे गाँव में उत्साह का वातावरण छाया था, चारों तरफ खूब चहल-पहल थी। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, सभी खूब मौज-मस्ती कर रहे थे। कच्चे घरों की दीवारों पर मनमोहक कलाकृतियाँ…
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वरदान दो 

  अपनी कृपा की कोर दो वरदान दो वरदान दो | वागीश वीणा वादिनी करुणा करो करुणा करो | मुझको अगम स्वर ज्ञान का वरदान दो वरदान दो | निष्काम…
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कविता (छन्द)

पुष्प के आसन बैठी लिये कर, बीन सुरूप छटा छिटकावति। पूरन चन्द समान सुआसन, कंज सों नैंनन की छवि छाजति।। जाके पवित्र चरित्र सदा, सब देव-अदेव हैं चाव सों गावति।…
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कारी-कारी कजरारी घटा

झूमि-झूमि-झूमि कारी-कारी कजरारी घटा, बूँद - बूँद डारि हिय आगि धरने लगी। दादुर, मयूर-धुनि सुनि-सुनि हाय राम, प्रेम नगरी की गली-गली जरने लगी।। मैं तो रही भोरी, ये अनंग बरजोरी…
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