कैसे लुटादें कशमीर क्यारी

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babulal sharma

आओ सभी भारत के निवासी।
चालें चली है अब जो सियासी।
पाकी  पड़ोसी  करता जिहादी।
आतंक  भारी  ज्वर है मियादी।

.       सीमा  सुरक्षा  अपनी करेंगे।
.       आतंक  कारी  हमसे  डरेंगे।
.       माँ भारती है हमसे सुभागी।
.       होने न देंगे  उसको अभागी।

सींची  लहू  से धरती हमारी।
कैसे लुटा दें कशमीर क्यारी।
देंगे शहीदी  हम तो  जवानी।
सीमा  निहारे  करलें  रवानी।

.       जीते   जियेंगे   वरना   मरेंगे।
.       आवाम  मेरे  हित  ही  करेंगे।
.       माँ भारती का सपना सजा दें।
.       आतंक सारा जड़ से मिटा दें।

राधे  मुरारी  धरती   तुम्हारी।
देखो कराहे  दुखिया बिचारी।
पाकी पिशाची करते जिहादी।
सोचे न  पापी  मनुता गँवादी।

.       माने  मनादे   समझे  बतादे।
.       गीता हमे तू फिर से सुना दे।
.       हे सारथी आज पुरा कहानी।
.       माँ भारती के हित दोहरानी।

सेना  हमारी  तव अारती के।
हो सारथी तू अब भारती के।
आओ कन्हैया  रथ में हमारे।
साथी भरोसे  हम  है तिहारे।

.       मेटे धरा से फिर  पाप सारे।
.       किस्से  बनेंगे अपने तुम्हारे।
.       पापी मरेंगे सत  ही बचेगा।
.       ईमान धर्मी  रखना  पड़ेगा।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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