प्रदूषण की पर्ची

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ashok kumar dhoriya

रामू गाँव से 35 किलोमीटर दूर एक शहर में नौकरी करता है।वह हर रोज बस से जाता है। एक दिन किसी कारण से वह लेट हो जाता है। बस प्रतिदिन की भाँति निश्चित समय पर निकल जाती है।

         वह अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए अपनी बाइक  लेकर चल देता है। दो किलोमीटर चलते ही एक पुलिस वाले ने बाइक को रुकवाया और उसका  प्रदूषण जाँच की पर्ची न होने के कारण चालान काट दिया।
        वैसे उसकी बाइक में कुछ खराबी भी थी जिसके कारण वह धुँआ कुछ ज्यादा ही छोड़ रही थी।रामू ने सोचा कि चालान तो कट ही गया अब वह रोजाना बाइक लेकर जाएगा। उस दिन के बाद वह धुँआ छोड़ता हुआ वहाँ से लगातार गुजरता है। पुलिस वाले उसे मिलते हैं लेकिन अब उसे कुछ नहीं कहते।
        एक दिन मैंने उससे पूछा-“आपकी बाइक इतना धुँआ छोड़ती है, क्या प्रदूषण वाले तुम पर कोई कार्यवाही नहीं करते ?”
तब रामू ने जवाब दिया-“मैंने प्रदूषण की पर्ची कटवा रखी है।”
रामू का जवाब सुनकर मेरी समझ में आया कि प्रदूषण की पर्ची कटवाने मात्र से ही प्रदूषण खत्म हो जाता है।
परिचय:-
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(हरियाणा)
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