बेड़ियां

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prerana

जहाँ में आई एक नन्हीं सी कली थी,
सभी की नूर थी नाजों से पली थी।

हंसती -खिलखिलाती सभी को प्रिय थी,
गृहलक्ष्मी का नाम संग में लिए थी।

घर से कदम बढ़े,कुछ आगे चली थी,
लड़खड़ाते कदमों से वह गिर पड़ी थी।

चलना जब सीखी स्कूल पहुँची थी,
ये सीखो,ये करो इन उलझनों में फंसी थी।

ये घर तेरा नहीं, इन बंधनों को पाया था,
क्या मैं इनकी नहीं, ये ख्याल आया था।

तभी उम्र से बढ़कर खुद को पाया था,
अपनों के बीच भी गैरों-सा ख्याल आया था।

कुछ करना चाहती थी यही मन में आस थी,
सबसे अलग बनने की जीवन में ख्वाहिश थी।

पर समाज ने बेटी को कब स्वीकारा है?
बेचारी को गलती पर सभी ने धिक्कारा है।

समझ आते ही बंधनों में बांधी गई,
समाज के भय से डोली में बैठाई गई।

पर एक प्रश्न अपने मन में हमेशा पूछती हूँ,
क्या यही मेरी मंज़िल है,यही सोचती रहती हूँ।

बीत गई आज मेरे बचपन की घड़ियां,
डाली गई पांव में मेरे बंधनों की बेड़ियां।।

                                                                               #प्रेरणा सेंद्रे 

परिचय: में रहती हैं। आपकी शिक्षा एमएससी और बीएड(उ.प्र.) है। साथ ही योग का कोर्स(म.प्र.) भी किया है। आप शौकियाना लेखन करती हैं। लेखन के लिए भोपाल में सम्मानित हो चुकी हैं। वर्तमान में योग शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।