*सर्दी*

Read Time4Seconds

babulal sharma
.             🏉🏉 *1* 🏉🏉
मौसम सर्दी का हुआ, ठिठुरन  लागे पैर।
बूढ़े  और  गरीब  से, रखती   सर्दी  बैर।
रखती  सर्दी  बैर, दोउ  को खूब सताती।
जो होते कमजोर,उन्हे ये आँख दिखाती।
कहे  लाल कविराय ,होय ये ऋतु  बेदर्दी।
चाहे वृद्ध गरीब, आय  क्यों मौसम सर्दी।
.             🏉🏉 *2* 🏉🏉
गजक पकौड़े रेवड़ी,मूँगफलीअरु चाय।
ऊनी कपड़े पास हो, सर्दी मन को भाय।
सर्दी मन को  भाय, रजाई कम्बल  होवे।
ऐसी  बंद  मकान, लगा  के हीटर  सोवे।
कँपे  गरीबी हाड़, लगे  यों शीत  हथौड़े।
रोटी नहीं नसीब, कहाँ है गजक पकौड़े।
.             🏉🏉 *3* 🏉🏉
ढोर  मवेशी  काँपते, कूकर बिल्ली मोर।
बेघर, बूढ़े  दीन  जन, घिरे  कोहरे  भोर।
घिरे  कोहरे  भोर, रेल बस टकरा जाती।
दिन में  रहे अँधेर, गरीबी बस  घबराती।
सभी  जीव बेहाल, निर्दयी सर्द  कलेशी।
जिनके नहीं मकान,मरे जन ढोर मवेशी।
.             🏉🏉 *4* 🏉🏉
युवा धनी की मौज है,क्या करियेगा शीत।
मेवा  लड्डू  खाय  ले, मिले  रजाई  मीत।
मिले रजाई  मीत, गर्म कपड़े  सिल जाते।
मिले रोज पकवान ,बदन को खूब पकाते।
कहे लाल कविराय,खाय गाजर के हलुवा।
शीत स्वयं कँप जाय ,मना लेते मौज युवा।
.               🏉🏉🙏🏉🏉

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

*मुलाकात* भाग -4

Mon Nov 26 , 2018
“आज हिम्मत करके आया था कि आज तो प्रपोज कर ही दूंगा”! KST के किनारे लक्खी  बुर्ज पर मिलना था उससे!  मैं असमंजस में था कि क्या गिफ्ट दूं फिर अचानक से याद आया कि गोल्डन पेन दे देता हूँ  हमेशा साथ रखेगी!  Deo छीड़ककर मिलने को तैयार हुआ और […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।