दीपावली पर दीप ही जलाए

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sanjay
सब से पहले तो में अपने देशवासियों को दीपावली की बधाई देता हूँ/ इस बार की दीपावली आप सभी को नई रोशनी लेकर आये और आपका जीवन खुशियों से भर जाए साथ ही  एक निवेदन भी करना चाहूँगा की आप सभी लोग वो कार्य बिलकुल भी नहीं करे, जिसके कारण दूसरो को कोई तकलीफ हो और आपकी दीपावली शुभ होने की वजह अशुभ न हो जाये, तो आप सभी लोग इस बात को ध्यान में रखे/  आप सभी लोगो को दुसरो की भावनाओ को भी समझना है / तभी आपकी और आपके परिवार की खुशियाँ रंग ला सकती है / दोस्तों इस दीपावली पर आप कुछ इस तरह का कार्य करे  की आपको और आपके सभी मिलने जुलने वालो को आप पर गर्व महसूस हो / तो आप क्या सोचते हो, कुछ सोचा क्या आपने  … , मैंने तो सोचा की में तो पटाखा नहीं फोडूंगा, जिस से हमारा पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा / हमारी कालोनी और नगर का वातावरण अच्छा रहेंगा / में  सिर्फ दीप ही प्रजुलित करूँगा  ताकि हमारे और हमारे पड़ोसियों के आँगन में सिर्फ प्रकाश की प्रकाश दिखे, कही भी अन्धकार न रहे और हमारा जीवन मंगलमय रहे, यही मेरी दीपावली होगी / ख़ुशी और उल्लास का ये त्यौहार क्यों न हम सब के दिलो को दीप की तरह रोशनी ही रोशनी दे ताकि उन सभी के जीवन में सिर्फ खुशियों और प्रसन्नता के समृध्दि की वर्षा हो / इन्ही विचारो के साथ आप सभी देशवासियों और हमारे पाठको को एक बार फिर से दीपावली की मंगलमय शुभ कामनाये देता हूँ :-
दीप जलाओ दीप जलाओ /
अपने अपने दिल को ज्योतिमय बनाओ /
है ये त्यौहार हर्ष और उल्लास का /
तो क्यों न हम सब ,
अपने अपने दिलो में दीप ही दीप जलायाँ /
और अपने अंदर के अँधेरे को दूर भगाये /
दीपावली पर दीप दीप ही जलाये /
सुख समध्दि और शांति पाए /
                                                 शुभ दीपावली ,

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।