गुरु की गरिमा

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sadhan choudhari
गुरु ज्ञान का भंडार होता है।
शिष्यों का गुरु के प्रति आगाध विश्वास ही सफलता की राह पर ले जाती है।किसी भी देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माता माता-पिता और गुरु ही होते है।
हिंसा करना और हिंसा से जवाब देना हर प्राणी को आता है और ये आम बात होती है लेकिन अहिंसा उन्हीं के पास होता हैं जो वास्तव में महान होते हैं अहिंसा का चिन्तन एक सामान्य व्यक्ति में कैसे लाया जाये इसका मूलमंत्र एक गुरु ही जानता है।
भौतिक प्राप्ति मिले यह सभी चाहते है सम्पत्तियाँ सभी चाहते हैं लेकिन जहाँ विचार है वहाँ सम्पतियाँ अपने आप ही चल देती हैं एक गुरु ही सदविचार सदगुण भरता हैं। हमारे उत्कर्ष और हमारे स्वप्न को साकार करने में गुरु का ही हाथ होता हैं।
जिस प्रकार व्यवसाय को चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार एक बेहतर समाज और एक  बेहतर राष्ट्र के निर्माण में अच्छे शिक्षक की जरुरत होती है।
एक गुरु ही अपने शिष्यो को बडे सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करता है।
हमारा पद हमारी योग्यता दर्शाता है और हमारी मनुष्यता ही  हमारा संस्कार है और यही किसी राष्ट्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर करता है।
हर वो इंसान गुरु होता है जो हमे कुछ न कुछ सिखाता है।
यह हमारे आपके सीखने पर निर्भर करता है कि हम आप कितना ग्रहण कर पाते है ।
गुरु का साथ हो तो कम संसाधन में भी बौद्धिक बल से बडा से बडा युद्ध जीता जा सकता है।
शिक्षक और शिक्षार्थी का दायित्व केवल ज्ञान देना और ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नही होता बल्कि उनका दायित्व समाज और राष्ट्र के प्रगति में सहयोग देने का होता है।
अपने आपको बेहतर बनाना हमारा कर्तव्य है हमे महान बनाने में हमारा मार्गदर्शन करना हमारे गुरु का कर्तव्य है।
हम विधार्थियों का जीवन कुम्हार के गीली मिट्टी के भाँति होता है, जिसे जैसे चाहे वैसे पात्र के रुप में ढाल दिया जाये एक बेहतर पात्र का निर्माण एक गुरु ही कर सकता है।जो कि राष्ट्र के हित में अपनी अहम भूमिका निभाता है गुरु का आसन ईश्वर से भी ऊंचा होता है इनका रहम करम अकथनीय है।
माता- पिता जन्म देते है तो गुरु जन्म
लिए पंचतत्व को महान विभूति बनाता है।
शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नही देते बल्कि राष्ट्र के मूल्यवान कर्णधारों का निर्माण इनके चरित्र का विकास भी करते है।
शिक्षा का अन्तिम उद्देश्य ही चरित्र का विकास करना होता है।
बिना अच्छे मार्गदर्शक के कोई भी व्यक्ति दुनिया का नेतृत्व सार्थकता के साथ नही कर सकता ।
बिना गुरु के कोई अच्छा मार्ग दर्शक नही होता।
माता – पिता और गुरु के आशीर्वाद के बिना जीवन चमक नही सकता।
कोई भी व्यक्ति कितना भी इन्टरनेट का इस्तेमाल कर ज्ञान अर्जित क्यों न कर ले लेकिन वह ज्ञान भी गुरु के ज्ञान के आगे फीका पड़ जायेगा।
किसी नें ठीक ही कहा-
गुरु ज्ञान की दीप की ज्योति से मन आलोकित कर देता है गुरु विद्या का दान देकर जीवन सुख से भर देता है।
गुरु का आसन ईश्वर से भी ऊँचा होता है गुरु के महिमा का जितना गुणगान किया जाए उतना कम होता है।
मै जितना लिखूँ गुरु के महिमा का पूर्ण गुणगान और बखान नही कर पाऊगी।
एक गुरु के बदौलत ही मै अपने पंखों को पसारे हुए इस नीले गगन में उड़ने की समर्थता रखती हूँ।
#साधना चौधरी
परिचय-
नाम- साधना चौधरी 
पिता- राजेन्द्र चौधरी 
माता- मीना देवी 
कक्षा- बीकाम द्वितीय बर्ष
छात्रा- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर।
पता-सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।