Read Time1 Minute, 40 Second
भोर हुई तो इंसा देखो,
ताकतवर बन जाता है ,
श्वासों में भर-भर कर आशा,
रंग नया भर जाता है ,
दिन-भर समय बिताता फिर,
शाम को घर आ आता है ,
सारे जग में अपने धन का,
फिर डंका बजवाता है ,
जैसे – जैसे आसमान में ,
बड़ते जाते हैं तारे ,
आंखों में आ जाती निंदिया,
होश नही रह पाता है ,
आने वाली सुबह को देखो ,
आंख खुले या बंद रहे ,
जीवन में श्वासों का आना ,
या ना आना मर्जी है ,
फिर भी इच्छाओं के वश में,
बंधकर क्यों रह जाता है वह,
फिर काहे की भागदौड़ ये,
जब जीवन फाका-मस्ती है,
हम तो अपने कर्म करें बस,
जीवन में सद्कर्म करें बस,
खुशियां ले आएं मनभर कर,
और बांटे सबको जी भर कर,
जीवन के हर राग से बढ़कर,
बस मुस्कानों की हस्ती है ,
भर लो मुस्कानों के झोले,
ये अब इतनी सस्ती है ।
#कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’
परिचय : कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) में गांधीनगर में बसे हुए हैं।१९६५ में जन्मे कार्तिकेय जी कई वर्षों से पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। रचनाओं के प्रकाशन सहित कविताओं का आकाशवाणी पर प्रसारण भी हुआ है। आपकी संप्रति शास.विद्यालय में शिक्षक पद पर है।
Post Views:
701