*प्रवाह*

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aditi rusiya

स्त्री
लुटती रही
नुचती रही
चीख़ती रही
चिल्लाती रही
पर
कोई न था
सुनने वाला
असहाय खड़ी
नीढाल पड़ी
रास्ते पर
साथ थी उसके
तो बस
अविरल प्रवाहित होती
उसकी अश्रु धारा
कितना ज़ालिम है
देखो
ये ज़माना
जिस माँ से
जन्म लिया
वो भी एक
स्त्री है
जिसने कलाई में राखी बाँधी
वो भी एक
स्त्री है
पत्नी भी
एक स्त्री है
फिर भी
न जाने क्यों
न कर पा रहा
सम्मान स्त्री का
सरे राह
लूटने को
तैयार खड़ा है
आज हर चौराहे पर
कहीं भी हिफ़ाज़त के लिए हाथ
नहीं बढ़ते
बढ़ते हैं तो बस ……
न शर्म बची
न हया ही कहीं
प्रेम की धारा
बहाने वाली
हर स्त्री
आज
कहीं भी
महफ़ूज़ नहीं

#अदिति रूसिया
वारासिवनी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।