*जिन्दगी*

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ARCHANA KATARE
जिन्दगी ……
तुम बहुत खूबसूरत हो,
बच्चों की मुस्कान हो,
भूखोँ की रोटी हो,
प्यासों का पानी हो,
निर्धन का पैसा हो,
बीमारों की दवा हो,
मजदूर की मेहनत हो,
सृष्टी का सृजन हो,
तपती धूप मे पेड की छाँव हो,
जाडे की गुनगुनी धूप हो,
सूखे की बारिस हो,
पतझड की आस बसँत हो,
सुहागिनोँ का सिन्दूर हो,
नारी की शक्ति हो,
तरूणाईयों का यौवन हो,
योगियों की ज्योति हो,
कवियों का भाव हो,
शिल्पीयों के कल्पना हो,
विद्यार्थियों की मेहनत हो,
सैनिकों का हौसला हो,
खिलाडियों का तमगा हो,
वीरों का झँडा हो,
बुढापे की आस हो,
मुसाफिरों का ठिकाना हो,
चालक की नजरें हो,
माझी की पतवार हो,
शराबियो का पैमाना हो,
नशेड़ियों का नशा हो,
जुआरियों की बाजी हो,
अर्चना कटारे
      शहडोल( मध्यप्रदेश)
परिचय
 
नाम:अर्चना कटारे
माता:श्यामा देवी गुप्ता
पिता : स्व.वीरेन्द नाथ गुप्ता
पतिःश्री नीरज कटारे
जन्म स्थानःसिहोरा
शिक्षाः एम ,ऐ ,इतिहास
कार्य क्षेत्र ःशहडोल
सामाजिक क्षेत्रःसमाज की उन्नति के कविताओं के माध्यम सेलोगों मे चेतना जाग्रत  करना
विधाः काव्य लेखन भजन,कवितायेँ
गद्यः सँस्मरण,लघुकथा, कहानी,यात्रा वृत्तांत,।
लेखनके क्षेत्र मे प्रयत्नशील हूँ, पाराँगत नहीं हूँ।
 
प्रकाशन ः 
वनिता पत्रिका, सरिता मे कुछ कालम प्रकाशित।
 
ग्रह लक्ष्मी पत्रिका मे एक कालम प्रकाशित हुआ।
 
गहोई बन्धु पत्रिका मे लगातार कविता  प्रकाशित होतीं रहतीँ है जो कि मरे मनोबल को बढातीँ हैँ।
 
समाचारपत्र ः
 
 दैनिक भास्कर, समय, पत्रिका , समाचार पत्रों में कवितायें ,और लेख लघुकथा का आना ,मरे लिये नयी ऊर्जा भर देती है।
लोकजँग मे मेरी रचना को स्थान मिला ये मेरे लिये बहुत गौरव की बात है ।
 
हिन्दी शब्द शक्ति मे प्रकाशित कवितायेँ,सँस्मरण, लघुकथा आदि।
 
।गहोई महिला मँण्डल द्वारा ,प्रकाशित प्रयास पत्रिका में कहानी *इँसानियत का नतीजा* भी लिखी ,जिसकी सभी ने सराहना की ।
 
कभी कभी व्यँगयात्मक कविता लिख देती हुँ।
 
किसी घटना को देख कर मेरा मन भर आता और मे अपने को न रोकते हुए भी लिख देती हुँ।
 
सम्मानः बडे रूप मे तो नही मिला ।
 
लेखन का उद्देश्य ः समाज को दहेज मुक्त करवाना, बेटियां पूरी तरह सुरक्षित हो, पर्यावरण सुरक्षित रहे, ज्यादा तर कविता मेरी सँदेशात्मक रहती हैँ ।देश की प्रगति हो आदि।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।