डा. स्वयंभू शलभ की चर्चित किताब *कोई एक आशियाँ* अब डूरस्टेपशोप्पी के वेबसाइट पर उपलब्ध

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डा. स्वयंभू शलभ की पाँचवी किताब ‘कोई एक आशियाँ’ डूरस्टेपशोप्पी सर्विसेस प्रा. लिमिटेड के वेबसाइट पर भी उपलब्ध हो गई है। ग्वालियर स्थित आईटीएम यूनिवर्सिटी के सेमिनार हॉल में बीते सोमवार को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कंपनी के वाईस प्रेसिडेंट पवन तिवारी एवं सीईओ प्रभव दुबे ने किताब के लोकार्पण के साथ संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की।
इस मौके पर श्री दुबे ने कहा कि स्तरीय साहित्य को पाठकों तक सरल तरीके से पहुंचाना भी कंपनी का उद्देश्य है। इसी उद्देश्य के तहत हिंदी साहित्य की इस चर्चित किताब का चयन किया गया है।
वहीं इस मौके पर श्री तिवारी ने कहा कि आज यह कंपनी अपने यूनिक डिलीवरी मॉडल के जरिये  ग्राहकों को कम से कम समय में हर प्रोडक्ट उपलब्ध करा रही है।
मौके पर कैटेलिस्ट डिज़ाइनर के सीईओ आकाश गौहर ने कहा कि उन्हें इस बात का फख्र है कि इस किताब का कवर डिज़ाइन तैयार करने का मौका उनकी कंपनी को मिला।
इस मौके पर कंपनी के एमडी शिरीष गुप्ता एवं डायरेक्टर पिंकू जायसवाल ने इस किताब की थीम के बारे में बताते हुआ कहा कि ‘कोई एक आशियाँ’ जीवन के विभिन्न रंगों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है जिसकी चारों कहानियाँ प्रेम के रूहानी अहसासों से सराबोर हैं।
गौरतलब है कि यह कंपनी आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर के छात्र प्रभव दुबे एवं सौरभ शलभ द्वारा स्टार्टअप के रूप में शुरू की गई थी।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।