कंगना को देखना हो तो देखें ‘सिमरन’

Read Time6Seconds
edris
शुक्रवार कॊ प्रदर्शित हुई फिल्म ‘सिमरन’ की अवधि १२६ मिनट है। यह कॉमेडी ड्रामा है,जिसमें सितारे के रुप में कंगना, सोहम शाह, कैथरीन, ईशा तिवारी और मार्क जस्टिस आदि हैं। निर्देशक हंसल मेहता की इस फिल्म का बजट २५-३० करोड़ रुपए है। तो कहानी है अमेरिका के जॉर्जिया में ३० वर्षीय तलाकशुदा, मध्यमवर्गीय लड़की प्रफुल्ल पटेल (कंगना) की,जिसके लिए ही ‘सिमरन’ देखी जा सकती है। यह उन्मुक्त विचारों के साथ अपने काम में लगी है। खुले विचार जैसे-सेक्स, शराब,जुंए को लेकर और पाश्चात्य संस्कृति दोनों ही इससे मेल खाती भी है,इसलिए प्रफुल्ल का बिंदास होना नयापन नहीं लगा।
लॉस वेगास में जुंए की लत के चलते एक गलत कदम जेल तक के दर्शन,और मुसीबतों की शुरुआत होती है। यह चोरी करने लगती है, यहां तक कि बैंक रॉबरी तक पहुँच जाती है। यहां एक अच्छे साथी की तलाश उसे बहकने में मदद करती है।
क्या प्रफुल्ल ज़िन्दगी की गाड़ी पटरी पर ला पाती है,इसके लिए तो सबकॊ फ़िल्म ही देखनी पड़ेगी।
कमजोर पक्ष की बात करें तो फ़िल्म की कहानी मध्यांतर तक तो स्थापना में लगी रहती है। ऐसे ही अमेरिका जैसे तकनीकी सम्पन्न देश में बैंक रॉबरी हजम नहीं होती है। मसलन किरदार, खुलापन और दूसरे मध्यान्तर में कुछ पटरी पर आते-आते देर हो चुकी होती है। हंसल ने ‘शाहिद’, ‘सिटी लाइट्स’ बनाई है तो उम्मीदें बढ़ना लाजमी था, लेकिन मामला जमा नहीं है।
सामने फरहान अख्तर की ‘लखनऊ सेन्ट्रल’ एवं ऋषि,परेश रावल की कॉमेडी फिल्म ‘पटेल की पंजाबी शादी’ फ़िल्म का होना भी नुकसानदेह होगा। साथ ही
कंगना-रितिक विवाद के अलावा कंगना- अपूर्व असरानी(लेखक सिमरन) विवाद और कंगना के बेबाक बयान (आप की अदालत) आदि कुछ कारण भी नुकसान साथ लाए हैं। ऐसे ही बहुत सारी पटकथा अंग्रेजी में होना भी एकल सिनेमाघर में इसके लिए नुकसानदेह होगा।
simran-first-poster-and-teaser-kangana-is-a-pure-delight-to-watch-0001
कलाकारों में कंगना को छोड़कर लगभग सभी अनजान हैं,इसलिए फिल्म कॊ शुरुआत में २-३ करोड़ से ज्यादा की आय की उम्मीद नहीं होगी,जबकि 
कुल पहले हफ्ते की आय१०-१२ करोड़ से ज्यादा नहीं होगी। इस तरह फ़िल्म लागत निकालती नहीं दिख रही है।
दीगर वसूली(यानी सेटेलाइट) संगीत से बजट निकाल सकती है।
संगीत देखें तो सचिन जिगर का अच्छा है। ७ गानों में मीत, सिंगल रहने दे, लगती है थाई, पिंजरा तोड़ के और बरस जा अच्छे बन पड़े हैं। फिल्म का मजबूत पक्ष है कंगना की अदाकारी। वैसे संगीत के सिवाय कुछ भी मजबूत नहीं है। इस फिल्म में कंगना के अभिनय की चमक फिर देखने को मिली है। बहुत सारे रुप में अभिनय करती दिखी,जो लाजवाब है।
फिल्म में अनुज धवन की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है,तो लोकेशन भी अनुज ने सुहावनी बना दी है।
कुल जमा फ़िल्म से निराशा हाथ लगती है। इस फिल्म कॊ एक सितारा कंगना के अभिनय का,एक संगीत-गानों का और आधा सितारा अनुज की सिनेमेटोग्राफी का है।

                                                                    #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शब्द

Sat Sep 16 , 2017
मन की अभिव्यक्ति है शब्द, तन की अनुभूति है शब्दl बोली की मिठास है शब्द, आपस में कभी खटास है शब्दl गीता के उपदेश हैं शब्द, सीता के संदेश हैं शब्दl मीरा की भक्ति है शब्द, कान्हा की शक्ति है शब्दl जीवन का हर भाव है शब्द, कभी धूप तो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।