मुझे भी गुनाह की इजाज़त मिलनी चाहिए

Read Time0Seconds
salil saroj
किसी की भी निगाह में मैं अब खुदा नहीं रहा
अब तो मुझे भी गुनाह की इजाज़त मिलनी चाहिए
उम्र की दहलीज पर वो अब भी एक बच्ची है
उसकी हरकतों को कुछ नई सी शरारत मिलनी चाहिए
आवाम कब तक यूँ ही कठपुतली सी तमाशा देखेगी
सिम्त जज़्बातों को कभी न कभी बगावत मिलनी चाहिए
बहुत देर पोशीदा रही मेरे ख़्वाबों की रंगीन ताबीरें
मेरी निगाहों को भी तस्वीरे-हुश्न
कयामत मिलनी चाहिए
तुम्हारे हाथों में सौप दी हैं हम सबने अपनी तकदीरें
हर हाल में हमें मुल्क की सूरत सलामत मिलनी चाहिए
मसला क्यों न कोई  भी हो मंदिर या मस्जिद का
इंसानों के दिल में हर घड़ी ज़िन्दा मोहब्बत मिलनी चाहिए
सलिल सरोज
नई दिल्ली
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आपका कुछ भी नहीं इस संसार में

Sat Aug 4 , 2018
इस संसार में हम और आप सभी लोग जन्म लेकर आते है और कुछ दिनों या सालो का इन्तेजार और समय व्यतीत करके फिर उसी जगह वापिस चले जाते है / सिर्फ छोड़कर जाते है कुछ अच्छे और सच्चे या कुछ विवादित शब्दकोष और फिर लोग जाने के बाद उन्ही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।