ग़ज़ल

0 0
Read Time2 Minute, 41 Second

om prakash yati

दिल में सौ दर्द पाले बहन-बेटियाँ

घर में बाँटें उजाले बहन-बेटियाँ

कामना एक मन में सहेजे हुए

जा रही हैं शिवाले बहन-बेटियाँ

ऐसी बातें कि पूरे सफ़र चुप रहीं

शर्म की शाल डाले बहन-बेटियाँ

हो रहीं शादियों के बहाने बहुत

भेड़ियों के हवाले बहन-बेटियाँ

गाँव-घर की निगाहों के दो रूप हैं

कोई कैसे सँभाले बहन-बेटियाँ

ओमप्रकाश यती

पिता : स्व॰ श्री सीता राम यती (स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी )

माता : स्व॰ परम ज्योति देवी

शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में .

सिविल इंजीनियरिंग तथा विधि में स्नातक और हिन्दी साहित्य में एम.ए.

प्रकाशन : पहला ग़ज़ल- संग्रह “बाहर छाया भीतर धूप” राधाकृष्ण प्रकाशन,दिल्ली से 1997 और

दूसरा ग़ज़ल-संग्रह “सच कहूँ तो” 2011 में प्रकाशित.

• कमलेश्वर द्वारा सम्पादित हिन्दुस्तानी ग़ज़लें , ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद….(1), सात आवाज़ें सात रंग आदि महत्वपूर्ण संकलनों में ग़ज़लें प्रकाशित .

. नागपुर में आयोजित आकाशवाणी के सर्व भाषा कवि-सम्मेलन -2008 में कन्नड़ कविता के हिन्दी अनुवादक कवि के रूप में भागीदारी.

• अखिल भारतीय साहित्य-कला मंच,मेरठ के “दुष्यंत स्मृति सम्मान-2011” से सम्मानित .

• ग़ज़ल-संग्रह “सच कहूँ तो “ के लिए इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती,दिल्ली का यशपाल जैन सम्मान -2013

• पंचवटी लोक सेवा समिति,नई दिल्ली द्वारा विगत 29 सितंबर ’ 2013 को “राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान -2013 “ प्रदान किया गया .

• 22 दिसंबर’2013 को “समन्वय “ सहारनपुर द्वारा ग़ज़ल के क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए सृजन-सम्मान ’2013 प्रदान किया गया।

• इन्टरनेट के कविताकोश (kavitakosh.org) के रचनाकारों में से एक.

सम्प्रति : उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में अधीक्षण अभियन्ता पद पर कार्यरत तथा वर्तमान में ओखला, नई दिल्ली में पदस्थापित

सम्पर्क : ग्रेटर नौएडा (उत्तरप्रदेश)

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

हिंदी तर हिंदी भाषी

Fri Jul 13 , 2018
मैं हूँ. तमिलनाडु  के हिंदी प्रचारक  . लिख रहा हूँ  ,अपनी हिंदी, अपनी शैली, अपने विचार.  प्रेम करता हूँ, अपनी मातृ भूमि से, अपनी देशी  भाषाओं  से सनातन धर्म के भक्ति मार्ग से.  आदी काल से आजकल की राजनीति एकता लाने के प्रयत्न में. पर स्वार्थी  मजहबी  , प्रेम भक्ति […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।