हिंदी तर हिंदी भाषी

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मैं हूँ. तमिलनाडु  के हिंदी प्रचारक  .

लिख रहा हूँ  ,अपनी हिंदी,
अपनी शैली, अपने विचार.
 प्रेम करता हूँ, अपनी मातृ भूमि से,
अपनी देशी  भाषाओं  से
सनातन धर्म के भक्ति मार्ग से.
 आदी काल से आजकल की राजनीति
एकता लाने के प्रयत्न में. पर
स्वार्थी  मजहबी  ,
प्रेम भक्ति एकता में बाधक
विदेशी आये शासक बने
 जनता में सहन शीलता
मंदिर तोड़, मसजिद बनाये
अंग्रेज़ आये  अपनी भाषा
छोड चले, हम अपनी भाषा भूल चले.
आजादी तो मिली, आधी रात को,
अंधकार में, अंग्रेज़ी  की उजाला का
अज्ञान  ज्योति जलाकर,
शासक जो नेहरू बने
अंग्रेजी  के पारंगत.
मंत्री मंडल में सब अंग्रेजी  पटु.
भूल गये मातृभाषा  और संपर्क भाषा.
आज हर जगह जनता चाहती
अंग्रेज़ी  माध्यम  की शिक्षा.
मातृभाषा  से नफरत.
 बगैर अंग्रेज़ी  के,
जीविकोपार्जन  असंभव.
  यदि मातृभाषा  को
आय और, नौ करी का साधन  बनाने
सत्तर साल की आजादी
अंग्रेज़ी  ही प्रधान.
आरक्षण  नीति योग्य लोगों को
विदेशी भगा देती.
फिर भी देश का विकास.
शिक्षा  में अनुशासन  की कमी.
फिर भी अनुशासित लोग.
भ्रष्टाचार  शिखर पर
फिर भी न्याय की झलक.
यह दिव्य भारत की दिव्य प्रभाव.
जानना-पहचानना,समझना मुश्किल.
  #आनंदकृष्णन सेतुरमण
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।