सजनी की धमकी

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rajni namdev
जन जी आगे आगे
   सजनी भी पीछे भागे
     हाथ  लिए झाड़ू आज
               खूब धमका रही
रात आये पी शराब
    बन ठाठ से नबाब
      झाड़ने लगे रुआब
             अब बतला रही
माना हो मेरे सुहाग
    बेसुरा क्यूँ गाते राग
        झेलना पड़े बैराग
            आज समझा रही
बीते साल दर साल
     करते   रहे    बेहाल
       देख झाड़ू का कमाल
            आज  दिखला  रही
                   रजनी रामदेव
                       न्यू दिल्ली
परिचय
नाम–रजनी रामदेव
शिक्षा- स्नातक
सम्मान–फेस बुक के विभिन्न साहित्यिक ग्रुप्स में समान पत्र प्राप्त
प्रकाशन– कुछ साँझा संकलन और देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में निरन्तर प्रकाशन तथा कुछ e-books में प्रकाशित रचनाएँ
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।