घोर अंधकार…..

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satendra sen

घोर अंधकार है, हर जगह विलाप है।
किरण कहीं छुपी हुई, पर भारी अंधकार है।

कोई भी खड़ा नही, न हाथ में मसाल है।
भिड रहे हैं जोर से, बस धर्म कि तलवार है।।

हिमालय सशांत है, नयन मे अश्रु धार है।
गंगा भी चीखती, ये कैसा रामराज है।।

हर घड़ी यहां खड़ी, मौत ही उपहार है।
हाथ है बंधे हुए, क्यो फौजी लाचार है।।

मां भारती है पूछती, चीखती विलाप में।
ये कैसा अंधकार है, ये कैसा अभिशाप है।।

है कोई जला दे जो, दीप एक प्रकाश का।
हो रहा घना यहां, ओर अंधकार ये।।

रो रहीं हैं जोर से, ये “सागर” कि लहरे बहुत।
बन गईं रुदाली ये, कर रहीं विलाप है।।

इक नई दिशा मिले, जो दीप कोई भला जले।
मिटा दे अंधकार ये, दिखा दे कोई राह ये।।

हर जगह प्रकाश हो, खत्म अंधकार हो।
लगे यूं ही जंग फिर, जो धर्म कि तलवार हैं।।

घोर अंधकार है, हर जगह विलाप है।
किरण कहीं छुपी हुई, पर भारी अंधकार है।।

#सतेन्द्र सेन सागर

नाम –सतेन्द्र सेन सागर
साहित्यिक उप नाम- सागर
वर्तमान पता- नई दिल्ली
शिक्षा- बीबीए(मार्केटिंग) ,  बीए(शास्त्री संगीत)
कार्यक्षैत्र- अर्धसैनिक बल
विधा- मुक्तक, काव्य, दोहा, छंद
सम्मान- साहित्य सागर रचनाकार

अन्य उपलब्धिया- आखर नामक काव्य संग्रह मे रचनाए प्रकाशित, देश भर के विभिन्न राज्यो के अखवारो ओर ब्लॉग में रचनाओं का प्रकाशन।

लेखन का उद्देश्य – एक सोच को जन्म देना, प्रेम के प्रति नजरिया बदलाव एवं एक इंकलाबी लेखक बनने का प्रयाश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।