Archives for लघुकथा - Page 2

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निर्भर आज़ादी

देश के स्वाधीनता दिवस पर एक नेता अपने भाषण के बाद कबूतरों को खुले आसमान में छोड़ रहा था। उसने एक सफ़ेद कबूतर उठाया और उसे आकाश में उड़ा दिया,…
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” बदलते मौसम “

 शैली और रोहन एक ही महाविद्यालय में पढ़ते थे । दोनों ने एस.एस. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय से एम. एस -सी. किया और नौकरी की तलाश में जुट गए ।…
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उद्यापन

देव को कालेज जाते देख भगती ने   कहा, "देव बेटा, तुम्हें याद है ना! आने वाली एकादशी पर उद्यापन करना है.सोचती हूं जितना जल्दी हो सके यह कार्य भी निपटा…
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प्याऊ का उद्घाटन

मलिन वस्ती के मध्य चौराहे पर आज सुबह से काफी हलचल दिखाई दे रही थी। आस-पास के लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। कुछ ही देर में वहाँ टेन्ट…
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डिब्बा  बेस्वाद #दवाई का

ना चाहते हुए भी वसु की आँखे नम थी।आँसुओं से आँखे भरी हुई पर वह ठान बैठी थी की आज वह उस अनमोल अश्क को गालों पर लुढ़कने ही नही…
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