Archives for लघुकथा - Page 2

“गरीबी कर”

एक  राजा था।उसे आभास हुआ कि एक कुएँ  में  कुछ लोगों  ने अवैध तरीके से गहने छुपा रखे है। उसने अचानक अपने  सिपहियों को कुआं खोदने का हुक्म दिया।खुदाई शुरू…
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हस्तेक्षप

सुबह के आठ बजने को थे। रमा अपने दोनों बच्चों का टिफिन बनाकर उन्हें स्कूल बस में बैठाकर लौटी ही थी कि तभी फ़ोन घनघना उठा। बुरा सा मुँह बनाकर…
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मेवा

अजीब सी बेचैनी बढ़ती चली जा रही थी , कई बार उठकर कई गिलास पानी पीने के बाद भी आग्रह को शांति नहीं मिल रही थी , एक तो गर्मी…
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दोहरी जिम्मेदारी

सत्तर की उम्र पार कर रहे रमेश और उनकी पत्नि राधा अपनी बहू रमा की तारीफ करते नही अघाते । जब भी कभी उनसे मिलने कोई रिश्तेदार या पड़ोसी आये…
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सृजन

          बहुत दिनो बाद  रामु  शहर से  गाँव वापस आ  रहा था l तीन-चार  दिन  के  य़ात्रा के बाद गाँव पहुंचा।  गाँव में  सब  कुछ बदला-बदला…
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मौन व्रत

रमा के मौन व्रत का आज सातवां दिन था। उसने परिवार में सबसे बोलना बंद कर दिया था। दिन भर सबके काम करना और फिर चुपचाप अपने कमरे में चले…
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