दिनाँक तीन सितम्बर २०१८ को प्रख्यात नवगीतकार, साहित्यकार , समीक्षक डॉ शम्भुनाथ सिंह की पुण्य तिथि के अवसर पर परेड कोठी कैंट बनारस में आयोजित समारोह में डॉ शम्भुनाथ सिंह शोध संस्थान ने उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत वाराणसी के साहित्यकारों को सम्मानित किया | समारोह की अध्यक्षता श्री […]
जिस सहर पे यकीं था वो ख़ुशगवार न हुयी देखो ये कैसी अदा है नसीब की समझा था जिसे बेकार, वो बेकार न हुयी मांगी थी जब तड़प रूह बेक़रार न हुयी कहूँ अब क्या किसी से देखकर माल-ओ-ज़र भी मिरि चाहतें तलबगार न हुयीं सोचा था जिन्हे अपना वो साँसें मददगार न हुयीं है अजीब अशआर क़ुदरत की भूल से छोड़ा था जिसे हमने वो निगाहें शिकबागार न हुयीं #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ Post Views: 91
