प्रेम के गीत गुनगुनाने वाली मखमली आवाज़, जो जाफरान की तासीर से तरन्नुम बना देगी, कश्यप की घाटी, पानी की नगरी या शंकराचार्य की भूमि के रूप में, लालचौक से क्रांति कहती जमीं हो चाहे, डल झील से टपकते पानी की बात होगी, शिकारों और तैरनेवाले घर (हाउस बोट) की […]
