Author Archives: matruadmin - Page 1013

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तुम हमसे जाने जाओ …

  तेरे अहसास के आगोश में, सोना भी खूबसूरत सपने जैसा लगता है। रातें भी उनींदी-सी लगती है कि, कोसों दूर भाग गई नींद जैसे... मेरा सुकून मुझसे दगा कर गया , इसकी वाजिब वजह हो तुम... हँस पड़ता हूँ कभी-कभी तुझे याद करके यूँ ही... और कभी खो जाता हूँ, हँसते-हँसते तुझमें। आँखें भी मुझसे धोखा कर गई,तेरा ही अक्स दिखाती है हर किसी में... लगता है तेरा वजूद रमा हुआ है मेरे अस्तित्व में, कि पहचान हो जैसे... एक-दूसरे की हम-तुम। बनी रहे ये पहचान सदियों तलक कि तुम भी मेरे अहसास में खो जाओ, कुछ ऐसा करें आओ, कि हम तुमसे पहचाने जाएँ... `मनु` तुम हमसे जाने  जाओ, तुम हमसे जाने जाओ...ll        …
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वेदना

है वेदना गर मेरे मन में, क्यूं धीर बूंदें खो रही हैं। क्यूं जागती हैं मेरे संग में, जबकि वो सुख से सो रही है॥ सावन की ये ठंडी हवा क्यूं,…
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अहसान

दिल में बसा के आपने अहसान कर दिया, दिल का जो पूरा आपने अरमान कर दिया। पाया जो इश्क़ यार का दीवानी हो गई, दुनिया से हमको यार ने अंजान…
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यादें

बादलों से उनका लगाव था, दामिनी के प्रति उनका झुकाव था, भ्रामरी से वे बातें करती थी, कोयलिया-सी कूक उत्साह भरती थी, तितलियां भी मदमस्त हो उड़ती थी, पास आकर…
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मैं तिरंगा हूँ…

मैं मेरी माँ का अनमोल गहना, फौजी का अरमान तिरंगा हूँ। मैं तीन रंगों में विभाजित,लेकिन एकता का रंग तिरंगा हूँ .......॥ मैं वीरांगना का उजड़ा सुहाग, सोलह श्रृंगार तिरंगा…
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रहने दो

और मत सोचो, क्या सोच-सोचकर प्रेम किया करोगे... इन चिड़ियों को देखो, दाना चुगते-चुगते भी प्रेम में होती हैंl उस पेड़ की हर शाख से प्रेम है इनको, जहाँ तिनका-तिनका जोड़…
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