वंदन है माँ भारती,रज चरणन की आस | दूर कभी करना नहीं, नित ही रहना पास ||१|| जग जंगल हिंसक यहाँ,नखधारी सब ओर| रक्छा करना मात तुम,तन-मन-धन सब कोर ||२|| मनसा वाचा कर्मणा,दिल दुखे नही और| मै तो नित पलता रहूँ ,चरणन शीतल ठौर ||३|| नाच उठी सारी धरा,तू जब […]
