ऐ खुदा हर दर्द को तू क्यों,दिल का पता देता मेरा, भूल क्यों जाता तू अक्सर में भी इक इंसान हूँ। शक सदा सोने पे जाता,कोयला कोई देखे नहीं, आग में क्यों झोंका मुझको,मैं तेरी पहचान हूँ। सह लिए जुल्मो-सितम,देने थे जितने दे दिए, आ जाओ तुम मेरे मुक़ाबिल,मैं खड़ी […]

आज आसमाँ भी रोया मेरे हाल पर और, अश्कों से दामन भिगोता रहा। वो तो पहलू से दिल मेरा लेकर गए और,  मुड़कर न देखा,मैं अब क्या करुं॥ उनकी यादें छमाछम बरसती रहीं, मन के आंगन को मेरे भिगोती रहीं। खून बनकर गिरे अश्क रुखसार पर, कोई पोंछे न आकर,मैं […]

  आसमाँ से जो उतर आई धरा पर, सूर्य की पहली किरण का तेज हो तुम। बादलों की गोद से जो बून्द सागर में गिरी, सीप से निकला हुआ मोती हो तुम॥ और जब बहारें झूम के आई चमन में, गुल भी हो कांटा भी हो,शबनम भी तुम। विश्व के […]

थोड़ा-सा वक्त दे दे मेरे मेहरबाँ मुझे, रोकर विदा करुं या हंसकर विदा तुझे॥ जाने क्या बात थी कि तस्वीर में तेरी, पलकों की पालकी से देखा किए तुझे। पत्ते गिरे हैं जब भी कहीं शाखों से टूटकर, दिल तो मेरा भी रोया है याद कर तुझे॥ दर से विदा […]

वो जो हर रोज बरसते थे घटाओं की तरह , हम भी एक रोज जो बरसे तो  बुरा मान गए। कभी शाखों से गुलों को नहीं तोड़ा करते, उनको दी थी जो हिदायत तो बुरा मान गए। फूल मसले जो उन्होंने नहीं देखे कांटे, एक कांटा जो चुभा था तो […]

  ‬(अटल जी को जन्मदिन पर  समर्पित) आसमाँ पर एक ही ध्रुव है अटल, है अटल। इस धरा के ध्रुव बनो तुम भी अटल,तुम भी अटल॥ हर किसी की आस्था विश्वास हो तुम, इस हिमालय के चमकते भाल हो तुम… तुमसे ही महके सदा ये विश्व पटल,विश्व पटल। इस धरा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।