संतो की वाणी में सत्य तो होता है . भगवान को भी  संतो की वाणी की रक्षा  करनी ही पड़ती है .संत मलूक दास जी के इस दोहे के संदर्भ में इन दिनो देश में तरह तरह की योजनायें चल रही हैं . अकर्मण्य और नकारा लोगों के हितार्थ सरकारें […]

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हैरान हूँँ मैं खुद से खुद कर हैं बेहाल दिल मेरा यूॅ अब तक क्या करें इस दौर में हम मक़सद ना मिला जीने का अबतक। हैरान हूँँ मैं खुद से खुद पर आज के इस दौर में कुछ कर ना पाया मैं यूॅ अब तक सोचता हूँँ हर कदम […]

मैंने स्वर्ग को… धरा पर उतरते देखा है। देवताओं को भी… चहल-पहल करते देखा है। ये जो मेरा घर है न… इसमें मैंने हर रुप को संवरते देखा है॥ यहाँ हिन्दुओं से विशेष स्नेह नहीं … न ही मुस्लिमों से परहेज़ है कोई। ये जो मेरा घर है न… इसमें […]

छोड़कर राहों में मुझको,जो गए तुम इस तरह… एक पल कटती नहीं ये,ज़िन्दगी की बात है। होंठ है खामोश मेरे ये कदम रुकते नहीं… तू नहीं,तेरे बिना ये मुफलिसी हालात है। राग है रंगीनियाँ,साज भी सरताज़ तुम… दिन भी है खामोश और खामोश-सी ये रात है। रोककर अपने कदम जो […]

  जुबां बन्द कर जख्म खाता रहा, जमाना मुझे आजमाता रहा।।   शिकायत नहीं की किसी से कभी, गलत फायदा सब उठाता रहा।   जरा-सा पलट के जो देखा मुझे, सुकूँ चैन ये दिल गँवाता रहा।   मनाज़िर अनोखा छला रूप का, खता प्यार की ये बताता रहा।   इजाजत […]

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मैं भी जीना चाहता हूँ… शामिल होना चाहता हूँ तुम्हारी दुनियाँ में बिलकुल वैसे ही… जैसे शामिल हुए थे तुम मेरे जीवन में एक जीवन्त आशा लिए। मेरे सूखे अधरों पर, बारिश की फुहार बनकर.. मेरी सांसों की रफ़्तार बनकर, एक खुशनुमा एहसास लेकर समाए थे तुम हमाररे अरमान बनकर। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।