प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पालना लेकर ब्रह्माकुमारीज् संस्था प्रमुख प्रकाशमणि दादी व दादी जानकी के सानिदय में रही प्रेम लता बहन ईश्वरीय ज्ञान की दिव्य विभूति थी।तभी तो जो भी उनसे मिलता प्रभावित हुए बिना नही रहता।यहां तक कि उनके मार्गदर्शन के कारण कइयो के जीवन की दिशा ही बदल […]

दिवंगतों के सद्कर्मो को याद हमेशा किया कर जो सद्कर्म बड़ो ने किए उन्हें खुद भी किया कर परिवार का जिनसे नाम हुआ उनका नाम लिया कर उनकी हर अच्छाई को जीवन मे अपना चलाकर जिनके पितर नई पीढ़ी से सन्तुष्ट हमेशा रहा करते उनके खुद के कष्टो का भी […]

आज तुम मुझे नकार दोगे अपनी आत्म-संतुष्टि की भूख में गिरा दोगे मुझे मेरे शीर्ष से जो मुझे प्राप्त हुआ है मेरे अथक प्रयत्न से और तुम चोरी कर लोगे मेरे सारे पुरूस्कार जो मेरे हाथ की लकीरों ने नहीं न ही मेरे माथे की तासीर ने दी है बल्कि […]

अपना कौन पराया कौन विपदा ही बताती है अपने पराये के भेद को अच्छी तरह समझाती है विपदा आने पर जो साथ छोड़ते अवसरवादी कहलाते है जो विपदा मे साथ निभाते सच्चे हमदर्द कहलाते है आँख मूंदकर विश्वास करे जो धोखा उन्ही को मिलता है विपदा आती बिना बुलाये चैन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।