कैसे छोड़ दू साथ प्रिये ! जीवन की ढलती शामो में, धूप छांव की साथी रही हो मेरे दुख सुख के कामों में।। साथ मरेंगे साथ जिएंगे, ये वादा किया था दोनों ने, क्यो अलग हो जाए हम , जब साथ फेरे लिए थे दोनों ने जर्जर शरीर हो चला […]

पीठ पर गठरी लादे, सफेद ट्रीम की हुई दाढ़ी वाला बाबा महीने में एक बार उस गांव में आ ही जाता था । जब भी आता था गांवभर की औरतें उसे घेर लेती और अपनी-अपनी पसंद का सामान पूछती थी उससे । पूरी बिसायत का सामान लिए वो बस गली-गली, […]

खंजर का कोई मज़हब नहीं‌ होता भारत माता आज युवा से प्रोढ़ता की ओर है। दर्द के हिलोरे आज भी पुरु जोर है देश का जर्रा जर्रा तेरा एहसान मंद है चाह कर भी दर्द तेरा बाँट सकते हम नहीं इस जहाँ में तुझको दर्द देने वाले माँ कम नहीं […]

काल के कपाल पर       नियति के भाल पर            लिखित शब्द मात्र है                      “अटल” ही “अटल” निःशब्द शब्द शब्द है      महाकवि को लब्ध है            काव्य जग […]

गत दिवस राष्ट्रपति जी ने केरल उच्च न्यायालय के एक समारोह में न्याय को जनता की भाषा में लाने के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय अंग्रेजी में निर्णय देते हैं लेकिन जो लोग अंग्रेजी को अच्छे से नहीं समझ पाते,उनके लिए न्यायालयों द्वारा स्थानीय भाषाओं […]

शैक्षणिक सत्र अक्टूबर से प्रारंभ होने के कारण भारतीय दूतावास के सौजन्य से इंडोलॉजी विभाग द्वारा हिंदी दिवस कार्यक्रम १७ नवंबर को संपन्न हुआ। शुभारंभ माँ सरस्वती को संदीप कुमार(भारतीय राजदूत),प्रो.व्लाहोविच स्तेतिच(अधिष्ठाता मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान),डॉ. इवान आंद्रियानिच(अध्यक्ष भारत विद्या विभाग)आदि के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कु. मारिया षिमग ने […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।