हिन्दुस्तां वतन है, अपना जहां यही है। यह आशियाना अपना जन्नत से कम नहीं है॥ उत्तर में खड़ा हिमालय रक्षा में रहता तत्पर। चरणों को धो रहा है,दक्षिण बसा सुधाकर। मलयागिरि की शीतल समीर बह रही है। हिन्दुस्तां…, यह आशियाना…॥ फल-फूल से लदे तरुओं की शोभा न्यारी। महकी हुई है […]

सतत प्रवाहित रहती, यह जीवन धारा बहती।      ऊषा के संग उठ मुस्काती,       किरणों  के संग नर्तन करती       दानों की आशा करते,      चूजों के संग कलरव      करती।       तरुपल्लवों को झुलाती मंद पवन,       कलियों […]

देश अपना वेश अपना, हर ओर परिवेश अपना। जमीं आकाश अपना है, मुक्त उड़ान भरो नभ में… पूरा करना अब सपना है॥ छोड़कर छोटी बातें अब, सृजन का पथ संवार लो। देश धरा पर बिखरी हुई, सब संपदा संभाल लो॥ संस्कृति की शालीन धरोहर, संस्कारों के अमूल्य मोती। चमक रही […]

मेरी राय में धर्म एक जीवन दृष्टि है। सभी प्राणियों से श्रेष्ठतर संवेदनशील मानव की। अपने सर्वोत्तम की खोज उसे पाने का प्रयत्न एवं आत्म साक्षात्कार के रूप में उस परम शक्ति की अनुभूति यही है धर्म का ध्येय। मानव मन की विभिन्न रुचियों के अनुसार कई मत-मतान्तर प्रचलित है। विभिन्न नदियों का मार्ग अलग […]

चलते-चलते थक गए थे पाँव, दिख नहीं पाई कहीं दरख्त की छाँव रोजी-रोटी की तलाश में, छोड़ आया था गाँव पर मिल कहाँ पाया, कोई रहने का ठाँव पड़ोस के दीनू काका, के कहने पर ही तो आ गया था महानगर में, औकात से कुछ अधिक कमाने की कामना में, […]

आज बहने लगी यादों की धारा, स्मृति ने एक सुन्दर दृश्य उभाराl  सुहानी शाम का प्यारा, मेरे गाँव का खूबसूरत नजाराl    दूर तालाब के उस किनारे, दिनमणि अपने धाम सिधारेl  संध्या छाई गगन पटल में, धीमे कदमों की आहट मेंl    रक्ताभ सुनहरी नारंगी, सुरमई श्याम पचरंगीl  सांध्य तारे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।