खामोशी

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pushpa sharma
जो तुम न कह पाए,तुम्हारी खामोशी ने कह दिया।
रुका हुआ बेबसी का पानी मेरी आँखों से बह गयाll
भूलना चाहकर भी भूल नहीं पा रही हूँ।
वो प्यार वो वादे संभाल रख न पा रही हूँll
वो हँसी वो कहकहे सब कल की बात हो गईl
जीता हुआ विश्वास अब हारी बिसात हो गईll
सपना सजा हुआ हमारा आज सारा रह गया।
जो न तुम……….ll

शीत की ठिठुरन हो या जलन हो ग्रीष्म कीl
आँधी तूफां और बारिश की कहाँ परवाह कीll
चल रहा था जिन्दगी का सफरl
साथ-साथ थे हम दो हमसफरll
कैसी आई बाढ़ वो अपना घरौंदा ढह गया।
जो तुम ………….ll

शुरू हो गया था गिले-शिकवों का दौरl
शक की सुई थी घूमती मेरे ही चारों ओरll
घर-परिवार भी मेरा अब न रहाl
मुझ पर किसी का जरा भी रहम न रहाll
सब अनमना-सब अनजाना सब बेमानी हो गया।
जो तुम…………….ll

घर से उठ बातें हो गई चौपालों कीl
कोर्ट-कचहरी के चक्कर कानूनी मसलों कीll
कोशिश की मैंने कई बार तुम्हें समझाने कीl
पर जिद थी तुम्हारी बात पर अड़ जाने कीll
थककर मैंने भी वो फैसला स्वीकार कियाl
जन्मों के बन्धन को कागज के पुर्जे पर वार दियाll

                                                   #पुष्पा शर्मा 
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।