ग़ज़ल

kp sinh

वही फिर हमें याद आने लगे हैं,
जिन्हें भूलने में जमाने लगे हैं।

न जाने उन्हें है हुआ आजकल क्या,
मुझे देखकर मुस्कुराने लगे हैं।

भले है नहीं आज औकात इतनी,
मगर बाेझ हद तक उठाने लगे हैं।

मुझे मार डालाे, मेरा कत्ल कर दाे,
कि हम हर कहीं सर झुकाने लगे हैं।

सितारे उन्हें दिख गए क्या तभी से,
नज़ाकत बहुत ही दिखाने लगे हैं।

अदालत उन्हीं की,वहां जज उन्हीं के,
सजा राेज ही वाे सुनाने लगे हैं॥

                                                                     #के.पी.सिंह

परिचय: के.पी.सिंह (कौशलेंद्रप्रताप सिंह)का लेखन क्षेत्र में साहित्यिक उपनाम-‘विकल बहराइची’ है। आपकी जन्मतिथि-१ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-पयागपुर (बहराइच,उ.प्र.)है। एम.ए. और बीएड शिक्षित श्री सिंह का कार्यक्षेत्र-गाे.ब.पंत कृषि एवं प्राैद्याेगिक विश्वविद्यालय (पंत नगर,उत्तराखंड) है। स्थाई पयागपुर और वर्तमान निवास शहर पंतनगर (उधमसिंह नगर) विश्वविद्यालय परिसर है।सामाजिक-साहित्यिक गतिविधि में आप राष्ट्रीय कवि संगम की जिम्मेदारी सम्भालते हैं। लेखन में आपकी विधा- दाेहा,छंद,ग़ज़ल एवं गीत है।आपको लेखनी की बदौलत काव्य श्री सम्मान,काव्य गाैरव सम्मान,राकेश साहित्य सम्मान और दिग्गज मुरादाबादी सम्मान आदि हासिल हुए हैं।रेडियाे पर(90.8 मेगा)भी आप कार्यक्रम का संचालन एवं लगभग २०० काव्य पाठ कर चुके हैं,तो लगभग ३०० कवि सम्मेलन-मुशायराें में भी काव्य पाठ किया है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान काे बढ़ाना एवं जनजागृति के साथ राष्ट्रीय चेतना की जागृति करना है।

matruadmin

Next Post

कारवां न चले मेरे संग में तो क्या

Sat Oct 7 , 2017
कारवां न चले मेरे संग में तो क्या, राह मेरी अकेले भी कट जाएगी। पग में हैं भरे मेरे काँटें तो क्या, चुन के उनको हटाना है आता मुझे। ज़ख़्म सहकर मैं मुस्कुराता सदा, दर्द जीना हमेशा सिखाता मुझे॥ देखकर मुश्किलें जो सहम जाऊँ मैं, आ के नाकामी मुझसे लिपट […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।