एक निवेदन

cropped-cropped-finaltry002-1.png

आदरणीय भाषासारथी,
मातृभाषा.कॉम आप सभी वरिष्ठ और नवोदित रचनाकारों के लिए एक सुनहरा अवसर लाया है, जहाँ हम परिवारजन जो बीते कई महीनों से वेब पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवा रहे हैं,अब अपना साझा काव्य संग्रह भी प्रकाशित करने जा रहा है..इसका नाम ‘मातृभाषा’ ही होगा और नाम अनुरुप विषय भी हिन्दी ही होगा..पोर्टल से नहीं जुड़े हुए रचनाकार भी इसमें शामिल हो सकते हैं..इसमें हिन्दी के प्रति जिम्मेदारी,शासन से हमारी मांग,हिन्दी की दुर्दशा पर पीड़ा आदि विषयान्तर्गत काव्य रुप में समाहित कर जनमंच तक उसे सशक्त हस्ताक्षर के रुप में पहुँचाने का प्रयास होगा..इसका विमोचन और सम्मान इंदौर (मध्यप्रदेश)के किसी प्रतिष्ठित सभागार या होटल में प्रस्तावित है।

🔹कविता (साझा संग्रह) के लिए अधिकतम १८ पंक्ति की ३ कविता,१ छोटा चित्र व परिचय आपको भेजना है..इसमें से १ रचना को ही संग्रह हेतु चयनित किया जाएगा।
***
🔹रचनाएं भेजने की अंतिम तिथि कॊ सदस्यों के अनुरोध पर बढ़ा दिया गया है..अब यह एक संकलन के सदस्य पूरे होने तक है..शीघ्रता कीजिए..

🔹प्रति रचनाकार न्यूनतम सहयोग राशि के आधार पर इस संग्रह को प्रकाशित कर विमोचन के अवसर पर वितरण और समारोह की योजना है।

🔹विशेष-आप सहयोग राशि पूर्व में ही बैंक में जमा करवाते हुए हमें सप्रमाण सूचना अवश्य दीजिए,ताकि आपकी रचना पुस्तक में शामिल कर पाएँ।

🔹ध्यानार्थ-साझा काव्य संकलन में ‘आईएसबी एन’ अंक होगा,साथ ही किताब का मुख्य पृष्ठ एवं छपाई भी उच्च स्तरीय रहेगी..यह हार्ड बाइंडिंग की किताब होगी।

🌸सभी संकलन ई-बुक के रुप में मातृभाषा.कॉम की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए जाएंगे।
आग्रह है कि,इच्छुक रचनाकार के तौर पर आप शीघ्रता से अपनी स्वीकृति-सहयोग राशि देकर matrubhashaa@gmail.com पर रचनाएँ भेज सकते हैं..देय राशि सूचित किए जाने वाले खाते में जमा करानी होगी।

राशि खाता क्र.- 53052939875 अजय जैन,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(ifsc-SBIN00 30144) से ही भेजिएगा..
******
पूछताछ-सम्पर्क:- 9770067300
###########
🌼योजना में शामिल होने के लिए प्रवेश का आधार ‘पहले आएं-पहले पाएं’ ही रखा गया है।
>>>>>>>>>>>>>>>>
सादर धन्यवाद।             टीम मातृभाषा
निवेदन-🙏🏻मातृभाषा हिन्दी पोर्टल पर अपनी ओर से रचना प्रेषण, प्रचार सहित यथासम्भव सहयोग बनाए रखिए..

धन्यवाद।

————————-
🔘अर्पण जैन ‘अविचल’
<> सह संस्थापक-मातृभाषा.कॉम(हिन्दी पोर्टल) भ्रमण भाष- +918839243077
<> प्रधान सम्पादक-ख़बर हलचल न्यूज़,इंदौर

अंतरताना- www.matrubhashaa.com

अणु डाक
matrubhashaa@gmail.com

दूरभाष
(O) 0731-4977455

matruadmin

Next Post

संस्कार 

Thu Sep 7 , 2017
एक मुहल्ले में दो परिवार रहा करते थे,विमल वर्मा और शांति सहाय। विमल वर्मा की पत्नी का नाम दुर्गा देवी और शांति सहाय की पत्नी का मृदुला थाl शांति सहाय कारोबारी थे,मन से शांत निर्मल स्वभाव दिल से कोमल और परिवार की शांति उनकी पूंजी थी। उनकी पत्नी भी बड़ी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।