एक निवेदन

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आदरणीय भाषासारथी,
मातृभाषा.कॉम आप सभी वरिष्ठ और नवोदित रचनाकारों के लिए एक सुनहरा अवसर लाया है, जहाँ हम परिवारजन जो बीते कई महीनों से वेब पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवा रहे हैं,अब अपना साझा काव्य संग्रह भी प्रकाशित करने जा रहा है..इसका नाम ‘मातृभाषा’ ही होगा और नाम अनुरुप विषय भी हिन्दी ही होगा..पोर्टल से नहीं जुड़े हुए रचनाकार भी इसमें शामिल हो सकते हैं..इसमें हिन्दी के प्रति जिम्मेदारी,शासन से हमारी मांग,हिन्दी की दुर्दशा पर पीड़ा आदि विषयान्तर्गत काव्य रुप में समाहित कर जनमंच तक उसे सशक्त हस्ताक्षर के रुप में पहुँचाने का प्रयास होगा..इसका विमोचन और सम्मान इंदौर (मध्यप्रदेश)के किसी प्रतिष्ठित सभागार या होटल में प्रस्तावित है।

🔹कविता (साझा संग्रह) के लिए अधिकतम १८ पंक्ति की ३ कविता,१ छोटा चित्र व परिचय आपको भेजना है..इसमें से १ रचना को ही संग्रह हेतु चयनित किया जाएगा।
***
🔹रचनाएं भेजने की अंतिम तिथि कॊ सदस्यों के अनुरोध पर बढ़ा दिया गया है..अब यह एक संकलन के सदस्य पूरे होने तक है..शीघ्रता कीजिए..

🔹प्रति रचनाकार न्यूनतम सहयोग राशि के आधार पर इस संग्रह को प्रकाशित कर विमोचन के अवसर पर वितरण और समारोह की योजना है।

🔹विशेष-आप सहयोग राशि पूर्व में ही बैंक में जमा करवाते हुए हमें सप्रमाण सूचना अवश्य दीजिए,ताकि आपकी रचना पुस्तक में शामिल कर पाएँ।

🔹ध्यानार्थ-साझा काव्य संकलन में ‘आईएसबी एन’ अंक होगा,साथ ही किताब का मुख्य पृष्ठ एवं छपाई भी उच्च स्तरीय रहेगी..यह हार्ड बाइंडिंग की किताब होगी।

🌸सभी संकलन ई-बुक के रुप में मातृभाषा.कॉम की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए जाएंगे।
आग्रह है कि,इच्छुक रचनाकार के तौर पर आप शीघ्रता से अपनी स्वीकृति-सहयोग राशि देकर matrubhashaa@gmail.com पर रचनाएँ भेज सकते हैं..देय राशि सूचित किए जाने वाले खाते में जमा करानी होगी।

राशि खाता क्र.- 53052939875 अजय जैन,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(ifsc-SBIN00 30144) से ही भेजिएगा..
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पूछताछ-सम्पर्क:- 9770067300
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🌼योजना में शामिल होने के लिए प्रवेश का आधार ‘पहले आएं-पहले पाएं’ ही रखा गया है।
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सादर धन्यवाद।             टीम मातृभाषा
निवेदन-🙏🏻मातृभाषा हिन्दी पोर्टल पर अपनी ओर से रचना प्रेषण, प्रचार सहित यथासम्भव सहयोग बनाए रखिए..

धन्यवाद।

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🔘अर्पण जैन ‘अविचल’
<> सह संस्थापक-मातृभाषा.कॉम(हिन्दी पोर्टल) भ्रमण भाष- +918839243077
<> प्रधान सम्पादक-ख़बर हलचल न्यूज़,इंदौर

अंतरताना- www.matrubhashaa.com

अणु डाक
matrubhashaa@gmail.com

दूरभाष
(O) 0731-4977455

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।