चाँदनी के लिए

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vijay gunjan
जागता ही रहा चाँदनी के लिए,
रातभर चाँद घन में छुपा ही रहा…।
भावनारण्य में मन भरमता रहा,
भाव जाने न कितने तिरोहित हुए।
बादलों ने बदल आचरण निज दिए,
और छद्मोन्मेषी पुरोहित हुए।
दे गया भ्रम पुनः कर गया विभ्रमित,
चित्त फिर भी न विचलित हुआ,सब सहा…….।
आज अवकाश आकाश में ना रहा,
ग्रह-उपग्रह सभी लड़खड़ाने लगे।
घोर गर्जन गरज घन किए इस तरह,
सृष्टि के चर-अचर थरथराने लगे।
वात वातायनों से बहक वेग से,
कल्पना-गन्ध को अब दिया ही बहा…….।
भाव आराधना -साधना के सभी,
भंग हो के पृथक दूर मुझसे हुए।
दांव पर लग गई आज तक की उमर,
हर कदम दर कदम रोज हारे जुए।
ज़िंदगी कट गई इस तरुण उम्र में,
वेदना की नदी में नहा ही नहा……।
जागता ही रहा चाँदनी के लिए
रातभर चाँद घन में छुपा ही रहा….॥
                                                                                             #विजय गुंजन
परिचय : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा साहित्यिक अवदान के लिए विजय गुंजन को पुरस्कृत किया जा चुका है। शंकरदयाल शर्मा स्मृति संस्थान द्वारा भी नवगीत रत्न सम्मान दिया गया था। आप बिहार राज्य के निवासी हैं। साथ ही बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में २०१४ में गीतकार के रूप में आरसी प्रसाद सिंह  सम्मान पत्र भी प्राप्त किया है। 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।