अश्विनी कुमार दुबे के उपन्यास पर समिति में चर्चा संगोष्ठी

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इन्दौर। श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर द्वारा “साहित्यिक समीक्षा” पर केंद्रित एक और नियमित आयोजन प्रारंभ किया जा रहा है इसमें प्रति माह के अंतिम शनिवार को किसी एक “चर्चित पुस्तक” पर चर्चा संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। शोधार्थी, पाठक और साहित्यकारों के बीच होने वाली इस बौद्धिक चर्चा से उत्कृष्ट पुस्तकों की जानकारी मिलने के साथ ही चर्चित साहित्य के प्रति रुझान बढे़गा। प्रथम आयोजन में वरिष्ठ लेखक अश्विनी कुमार दुबे के उपन्यास ‘रास्ते इधर से भी हैं’ पर चर्चा संगोष्ठी से हुआ। लेखक ने अपनी रचना प्रकिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ‘मुझे अपने लेखन से कोई क्रांति नहीं करनी वरन लेखन से सामाजिक समरसता और सकारात्मक चिंतन की प्रतिष्ठा करना चाहता हूँ।’ रचनाकार का परिचय देते हुए कथाकार सतीश राठी ने कहा कि ‘पुस्तक जीवन मूल्यों की स्थापना और मूल्यों के हस्तांतरण का संदेश देती है।’ पुस्तक पर समीक्षात्मक चर्चा करते हुए अंतरा करवड़े ने औपन्यासिक शिल्प और इसमें निहित दर्शन की चर्चा करते हुए कहा ‘यह जमीन से जुड़े अनुभवों का दस्तावेज है जिसके द्वारा सकारात्मकता पर भरोसा जताया है।’
आयोजन में डॉ.रामकिशन सोमानी, डॉ.अर्पण जैन, डॉ.पुष्पेंद्र दुबे, डॉ अखिलेश राव, डॉ.किसलय पंचोली, दीपक गिरकर आदि साहित्यकार उपस्थित थे जिनके गंभीर प्रश्नों के उत्तर भी लेखक ने दिए। विचार ,दर्शन के साथ गंभीर लेखन पर चर्चा के इस अभिनव आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए संचालन समिति की साहित्य मंत्री डॉ.पद्मासिंह ने किया और अतिथि स्वागत प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर जी ने किया आभार शोध मंत्री डॉ पुष्पेंद्र दुबे ने माना।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।