विधायक जितेंद्र वर्मा की छवि धूमिल करने का प्रयास

0 0
Read Time4 Minute, 48 Second

आगरा ।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कोरोनावायरस महामारी ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है । पिछले दो वर्षों से आम आदमी का जीवन कांटो भरी डगर पर चल रहा है । आम आदमी की जमा पूंजी पूरी तरह से खत्म हो गई है और वर्तमान रोजगार- धंधे लगभग बंद हैं । संघर्षमय जीवन जी रहे आम आदमी को अधिक समय तक नहीं निचोड़ा जा सकता है । कुछ ऐसा ही हुआ, थाना – निबोहरा में… एक ग्रामीण युवक को चेकिंग के दौरान पुलिस ने रोका । युवक ने मास्क नहीं लगाया था । खाकी ने पूछा- मास्क क्यों नहीं लगाया । वही सवाल उस ग्रामीण युवक ने पुलिस से दोहरा दिया –  सर मास्क तो आपने भी नहीं लगाया । बस फिर क्या था, वहीं सड़क पर थर्ड डिग्री शुरू । जब खाकी लट्ठ चटका-चटकाकर  थक गई तो उस ग्रामीण युवक को लॉकअप में बंद कर दिया ।
 इस घटना की जानकारी जब क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र वर्मा को पता चली तो वे भी घटनास्थल पर पहुंच गये और दोषी पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर होना पड़ा । इसी बीच जनता को समझाते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी चौराहे या स्थान पर इस तरह के भ्रष्ट पुलिसकर्मी जनता को परेशान करें तो मुझे सूचित करें । तुरंत कार्यवाही करवाने का प्रयास किया जाएगा । वहीं ईमानदार पुलिस कर्मियों की उन्होंने सराहना भी की । साथ ही जनता से अपेक्षा की कि कोरोनावायरस से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जो निर्देश दिए हैं, जनता उनका पालन करे । इसी घटना का वीडियो विधायक के विरोधियों ने कांट-छांट कर स्थानीय मीडिया व सोशल मीडिया पर वायरल करा दिया । 
आपको बता दें कि विधायक जीतेंद्र वर्मा अपने सामाजिक कार्यों व जमीन से जुड़े नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं । यही बात उनके विरोधियों को हजम नहीं होती । वे हमेशा विज्ञापन बाजी से दूर रहते हैं । 
पिछले वर्ष जब संपूर्ण लाॅक डाउन लगा था तब जनपद का कोई नेता दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता था, चाहे वो किसी भी पार्टी का रहा हो । उस समय सड़कों पर, गली- मोहल्लों में विधायक जितेंद्र वर्मा राशन बांट रहे थे, लंगर चला रहे थे । उनके इन्हीं कार्यों से प्रभावित होकर मैंने उनकी एक खबर लिखी थी, बगैर उनकी अनुमति के, वैसे अच्छे कार्यों के प्रचार- प्रसार के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ती । जब मुझे उपर्युक्त घटना के संबंध में जानकारी हुई तो पुनः एक साल बाद यह खबर उनके लिए लिखनी पड़ रही है । हालांकि मैं राजनैतिक घटनाओं पर अपनी कलम नहीं घिसता । परन्तु यह खबर आम जनमानस से जुड़ी होने की वजह से मुझे लिखनी पड़ी । स्थानीय मीडिया को विज्ञापनों व चाटुकारिता के लालचरुपी मकड़ जाल से बाहर निकलना चाहिए । और आम जनमानस से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देनी चाहिए । 
आपको बता दें कि जनता ने विधायक जितेंद्र वर्मा का समर्थन किया है, तो अन्य कुछ लोगों का मानना है कि उनका वह बयान राजनीति से जुड़ा है । खैर मामला जो भी रहा हो, घटना का प्रारंभ तो आम जनमानस से जुड़ा है और हमारा कर्तव्य है कि देश- दुनिया को पूरी घटना से अवगत कराया जाये। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि देश भर में रोज पुलिसिया कारनामें उजागर हो रहे हैं । चंद मुट्ठीभर भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की वजह से पूरा पुलिस विभाग बदनाम होता है । ऐसे रिश्वतखोरों पर उच्चाधिकारियों को नकेल कसनी चाहिए ताकि जनता सेना की तरह पुलिस को भी सम्मान की दृष्टि से देखे ।
# मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

matruadmin

Next Post

शुभ प्रभात

Thu Jul 15 , 2021
उगता सूरज दिखा रहा है,जादू अपनी किरणों से, ओस के मोतियों को,पिरोता है अपनी किरणों से। बिगुल बजा देता है,उठो भोर अब हो गई है दोस्तो अलसाई आंखो से नींद चुरा लेता अपनी किरणों से।। आर के रस्तोगी गुरुग्राम Post Views: 39

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।