
संसार है एक धर्मशाला
यहां आते जाते है लोग
कोई सदा नही रहा यहां
नही रहा सदा एक का जोर
परमात्मा की कठपुतली है सब
जब जैसे चाहे वैसे नचाये
याद परमात्मा रहा जिसे
वही रहा परमात्म सिरमौर
कमाई दौलत यही रह जाती
सिर्फ कर्म से बंधी है भाग्य डोर
आओ कर्म के पथ पर चले
चले नव निर्माण की ओर।
#श्रीगोपाल नारसन

