ससुराल हेल्प लाइन

इनदिनों खबर आ रही है कि देश के कई इलाके में लोग घर में बैठे-बैठे पत्नी
से लड़ रहे हैं। इसलिए देश के गृहस्थी मंत्रालय ने पति हित में एक निर्देश
जारी किया कि पत्नी से लड़ों, मगर पत्नी वायरस के योद्धाओं से नहीं। पत्नी
की ढाल के लिए उनके मायके वालों को पत्नी योद्धा के रूप में तैनात किया
गया है। जो भी पत्नी से लड़ेगा उसे पत्नी वायरस योद्धाओं के द्वारा सबक
सिखाया जायेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि पत्नी की करो देखभाल,
देश हर हाल में जीतेगा पत्नी वायरस से। अगर पत्नी ज्यादा तंग करे तो
ससुराल हेल्पलाइन पर संपर्क करें। वहां से दिये गये निर्देशों का पालन
करें।
कई दिनों से बोतलदास भी अपनी पत्नी से लड़ रहा था। उसने ससुराल हेल्पलाइन
नंबर पर फोन लगाया तो उसे जवाब मिला-पत्नी से लड़ो मगर पत्नी की ढ़ाल के
लिए तैनात पत्नी वायरस के योद्धाओं जैसे साला, साली, साढू इत्यादि से
नहीं। हेल्पलाइन नंबर पर दिये गये निर्देशों का पालन करते हुए बोतलदास ने
पत्नी से लड़ना बंद कर दिया। लेकिन पत्नी थी कि मानती ही नहीं। वह उसे
निकम्मा, बेरोजगार कहकर बारंबार चिढ़ा रहीं थी। बोतलदास की पत्नी ने उसे
कई बार कहा कि घर में बैठे रहने से अच्छा है कुछ काम धंधा ढूंढों लेकिन
उसके लिए मुसीबत यह थी कि देश में पत्नी वायरस अपनी जड़े जमाये हुए था।
सोच रहा था कि घर में रहो तो पत्नी का डर है और घर से निकलो तो पत्नी
वायरस का खतरा है। दूसरों की पत्नियां घर से बाहर निकले ही उस पर डोरे
डालने लगती हैं। उसके पहनावा-ओढ़ावा से लेकर चाल-चलन पर टिप्पणी करती हैं।
जब वह उन्हें ऐसा करने से मना करता है तो वे उसे भला-बुरा कहने लगती हैं।
बोतलदास बहुत ही खूबसूरत आदमी है। उसे याद है कि जब वह कालेज में पढ़ता था
तो लड़कियां उसे कहती थी तुम फिल्म अभिनेताओं की तरह दिखते हो। अगर
बालीबुड चले जाओ तो तुम राजकपूर और देवानंद की तरह हिट हो सकते हो। लेकिन
उसकी कोई तमन्ना फिल्मी दुनिया में जाने की थी नहीं। यही सोच कर वह
बालीवुड नहीं गया। पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में
नौकरी करने लगा। जब वह उस कंपनी में काम करने गया तो वहां भी लड़कियां उस
पर डोरे डालने लगी। इसी बीच उसकी शादी भी हो गयी। लाकडाउन के दिनों में
उसकी रही सही नौकरी भी चली गयी। इसके बाद वह घर पर ही रहने लगा। पत्नी से
रोज उसका गृहयुद्ध छिड़ने लगा। घर घर न होकर कुरूक्षेत्र के मैदान में
तब्दील हो गया।
एक दिन उसका पत्नी से झगड़ चल ही रहा था कि पड़ोसी ने ससुराल हेल्प लाइन
नंबर पर काल कर दिया। इसके बाद पत्नी के बचाव में योद्धा आ गये। उन्होंने
उसे समझाया कि तुम अगर पत्नी से लड़ोगे तो घरेलू हिंसा कानून के तहत तुम
पर कार्रवाई हो सकती है। बोतलदास डर गया। लेकिन पत्नी वायरस के योद्धा भी
कम नहीं थे। उन्होंने उसे कुछ दिनों के लिए घर के एक कमरे में उसे
क्वारंटाइन होने का निर्देश दिया। बोले कमरे के अंदर चले जाओ। तुम्हें
ससुराल प्रशासन के द्वारा पंद्रह दिनों तक मुफ्त राशन दिया जायेगा।
पति-पत्नी के बीच बोलचाल बंद रहेगी तो घर में शांति आ जायेगी। किसी तरह
की जरूरतों को पूरा करने के लिए ससुराल हेल्प लाइन हमेशा खुली हुई है जब
चाहो काल करके अपनी समस्याओं को रख सकते हो। यह कहकर पत्नी वायरस के
योद्धा चले गये। जाते हुए उन्होंने कहा पत्नी की करो देखभाल, देश पत्नी
वायरस से जरूर जीतेगा।

नवेन्दु उन्मेष
रांची

matruadmin

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हिन्दी को भी चाहिए संक्रमण से मुक्ति

Tue Sep 15 , 2020
हिन्दी है माथे की बिंदी, इसका मान बढ़ाएंगे. हम सब भारतवासी मिलकर इसे समृद्ध बनाएंगे.. #विनोद बंसल **लेखक विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।