शहीदो के चरणों में मेरे चारों धाम है*

0 0
Read Time2 Minute, 29 Second
IMG_20180820_115044
दौसा ।   
                        राष्ट्रीय कवि चौपाल,शाखा-दौसा के तत्वावधान में 20वीं काव्य गोष्ठी का आयोजन बजरंग मैदान स्थित सामुदायिक भवन में आदरणीय रामबाबू शर्मा की अध्यक्षता में हुआ।
                     संयोजक कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज” ने बताया कि काव्य गोष्ठी में दौसा के वरिष्ठ साहित्यकार शिवचरण भण्डाना को  “राष्ट्रीय कवि चौपाल सम्मान और स्वर्ण पदक” से सम्मानित किया गया।
        इस कड़ी में दौसा के नवोदित युवा एवं वरिष्ठ साहित्यकार मौजूद थे।
अनुराग महावर”प्रेमी”लालसोट ने मेरे वतन के काम मेरा अस्थि पंजर आ जाए…..।
अलवर के सतीश गुर्जर ने अटल जी को याद करते हुए देश भक्ति रचना सुनाई….।
शिवचरण भण्डाना ने “मेरे देश के जवानों से तुम सबूत मंगवाते हो “…..।
कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज” ने “शहीदों के चरणों में मेरे चारों धाम है”…..।
लालसोट के कुमार विजय राही ने “उनको तो दुनियादारी आती है,हमको तो बस रोना धोना आता है”….।
अशोक  शर्मा खेड़ला ने “हास्य मिमिक्री करते हुए “दिल में अब दर्दे मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं…..।
संचालन कर रहे रामबाबू शर्मा”राजस्थानी ” ने “एक चिणगारी भी आग से कम नहीं होती…….।
मूलचंद पांचाल ने “इंसान ही इंसान को मार रहा है”…..।
काव्य गोष्ठी के बाद भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल बिहारी जी वाजपेई के निधन पर 2 मिनट का मौन मिनट का मौन 2 मिनट का मौन 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसमें पत्रकार कैलाश चंद सैनी,पत्रकार बबलू दैनिक भास्कर,मनीष शर्मा,रामजीलाल सैनी, लेखराज सैनी,कन्हैया लाल सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं श्रोता मौजूद रहे।
#कृष्ण कुमार सैनी”राज”

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सावन के दोहे

Mon Aug 20 , 2018
१)महिना सावन आ गया, रिमझिम है चहुँ ओर। पेड़ों पर फल लद गये, नाचे वन में मोर।। २)छाता साजन ले गये, भीगे मन के तार। तडप रहा पूरा बदन, मन में उठे हुलार।। ३)देख घटा बढ़ने लगी, पिया मिलन की प्यास। बैठ गयी सज-सँवर के ,सजनी पी के पास।। ४)रिमझिम […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।