
मेरे हर संकट में मिलता ,
है अविलम्ब सहारा।
हे दीनों के नाथ,
दीनानाथ तुम्हारा।।
नाव करे जब डगमग,
मिले न कहीं किनारा।
अतुलित छवि हिय में,
बसता मुस्कान तुम्हारा।।
जब भ्रमित कहीं मन मेरा,
पथ दर्शक दिनकर तुम हो।
जब व्यथित कहीं मानस हो,
शुचि सम्बल प्रभुवर तुम हो।।
चन्दन सी शीतल मोहक,
मधुमय शुभ भान तुम्हारा।
प्रतिपल प्रतिपग तव सम्बल,
प्रतिक्षण हो आप सहारा।।
#डा.मीना कौशल गोण्डा(उ.प्र)

