सिसकता बचपन गिद्धों के झुंड में नोचते मांस पैशाचिक मंडियों में खबर नहीं खबरनवीसों को निकलेंगे कैंडल शहरी नहीं घटना घटी जो झुग्गी बस्ती में सरोकार उनसे है नहीं।। तौलते सम्मान इनका सियासत की तराजू में, घुटती मसलती कलियां आवाज गुम रुलाई में।। शर्मसार बाज़ार घूमते सियार घूरती हैवानियत जिल्लत […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
संस्कृति की जन्भदात्री है, यह हमारा देश। अलग-अलग धर्म है,तनिक भी नहीं द्वेष।। ऋषि मुनि गुरूजन का , संस्कृत था प्राण। रचते-रचते रच दिए,कितने ही वेद-पुराण।। धरा रही दानवों की,भूल गयी संस्कृति। हिंसात्मक न सोच हो, ना फैलेगी विकृति।। संस्कृत से समाज का,कालान्तर से उद्धार। नित-दिन उजागर हो,सभ्यता का द्वार।। […]
