तुम्ही पे इतना क्यों मरने लगे है । तुम्हे देखकर सँवरने …..लगे है ।। नींद आती नहीं सारी सारी रात । बिस्तर पर करवट बदलने लगे है ।। जादू कोई कर गई तुम्हारी अदाएं । दीवानों से हम… मचलने लगे है ।। अंदाज मेरा भी शायराना हुआ है । अरमान […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
पृथ्वी को चारो तरफ से घेरे हुए हैं जो सुंदर आवरण। उसे ही कहते हैं हम पर्यावरण।। ************************* प्रकृति में सीमित है सब संसाधन। इसलिए सोच -समझकर करो इसका दोहन।। ************************* मानव प्रकृति से करके छेड़छाड़। अपना ही कर रहा है बिगाड़।। ************************ जब से शुरू किये हैं वनो की […]
