देख कर करतूत जमाने की, मेरा खून ख़ौल उठता है! कैसे पैदा करूँ मैं बेटी, एक बेबस बाप बोल उठता है!! अगर दुनिया में आयी मेरी बेटी, ये दरिंदे जीने ना देंगे! ना सुख से रह पाएगी वो, घूंट पानी की पीने ना देंगे!! कहां छिपाऊँगा उस कली को,कहाँ-कहाँ साथ […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
