अपना देश अपना वेश फिर क्यूं अपनाएं हम विदेशी, अपना वतन,अपना स्वदेशी। विदेशी वस्तुओं का करे बहिष्कार, मिलकर स्वदेशी सामान करें स्वीकार। चीन को उसकी औकात बताए, स्वदेशी अपनाकर शान दिखाएं। चीनी बाजारों को भंग करे, अपना वतन आबाद करें। नहीं चाहिए गुड्डे गुड़ियों का साया, बनता जो विदेशी सामान […]

अहंकार जिसने किया चैन से वह नही जिया शांति उसकी चली जाती प्रेम की विदाई हो जाती दुसरो का भी चैन हर्ता खुद भी बेमौत मरता रावण ने भी यही किया कंस ने अत्याचार किया बल,बुद्धि काम न आई विनाशकाले जान गंवाई चीन भी इसी राह पर है खुद मरने […]

काश! मैं इस नीरव आकाश तले स्वतंत्र विचरण कर पाती काश! यह निर्बाध समीर मेरी देह को मृत्युंजयी स्पर्श दे पाता काश! रात्रि की गोद में बैठ गंगा लहरियों की स्वच्छंद जलक्रीड़ाएं महसूस कर पाती काश! चांद की चंचल चंद्रिकाएं मेरे कपोलों से मनोनुकूल खेल पाती काश! आकाश का शीतल […]

मिल जाए लिखी अच्छी बाते, उस पर अम्ल होना चाहिए। भले ही मेरा भारत महान नहीं, उसे हमेशा महान कहना चाहिए।। करना चाहती है वे देह व्यापार, पर उसे वैश्या कोई भी ना कहे। अच्छा है उनको फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी हीरोइन बन जाना चाहिए। बोलता रहे झूठ भरी अदालत […]

समय बहुत बलवान है यथार्थ स्वीकार लीजिए रंक से यह राजा बना दे राजा को यह रंक बना दे शक्ति इसकी पहचान लीजिए समय को गर पहचान लिया समय से चलना जान लिया समय उसी की मुठ्ठी में रहा समय का विजेता वही रहा उसी को सफल जान लीजिए एक […]

दिल से दिल मिलाकर देखो। जिंदगी की हकीकत को पहचानो। अपना तुपना करना भूल जाओगे। और आखिर एक ही पेड़ की छाया के नीचे आओगे। और अपने आप को तुम तब अपने आप को पहचान पाओगे।। क्योकि छोड़कर नसवार शरीर, एक दिन सब को जान है। जो भी कमाया धामाया […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।