धोरां री धरती अठै, चांदी सो असमान। पाग अंगरखा केशरी, वीराँ रो अरमान। वीराँ रो अरमान, ऊँटड़ै शान सवारी। रेगिस्तान जहाज,ऊँट अब पशु सरकारी। कहै लाल कविराय, पर्यटक आवै गोरां। देवां रै मन चाव, जनमताँ धरती धोरां। खाटो सोगर सांगरी ,कैर काचरी साग। छाछ राबड़ी खीचड़ी,मरुधर मिनखाँ भाग। मरुधर मिनखाँ […]
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ये काली दुनिया चमत्कारी दुनिया । बात हमारी तुम्हारी दुनिया। धन कुबरो की चमचमाती दुनिया। नेताओं की भीआईपी दुनिया। गरीबो की लाचारी दुनिया। बुजुर्गो की वेबशी दुनिया। महिलाओं की उत्पीडन दुनिया। अनपढो की अंधविश्वासी दुनिया। बीमारो की खर्चीली दुनिया। डाक्टरो की मन मौजी दुनिया। प्रवक्ताओ की झूठी दुनिया। चैनलो की […]
