रावण को जन सामान्य में राक्षस माना जाता है। जबकि कुल,जाति और वंश से रावण राक्षस नहीं था। रावण केवल सुरों (देवताओं) के विरुद्ध और असुरों के पक्ष में था । रावण ने आर्यों की भोग-विलास वाली ‘यक्ष’ संस्कृति से अलग सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की […]
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अनुवाद से मौलिकता समाप्त होती हैं ,गुणवत्ता का ह्रास होता ।मातृभाषा को ही शिक्षा का माध्यम बनाओं -आचार्य विद्यासागरजी मसा. नागदा (धार) | विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर 2019 को शिक्षाविद स्व.डॉ.गुलाब चौरसिया की स्मृति में शिक्षक संदर्भ समूह भोपाल द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पावन निश्रा में […]
