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पाकिस्तान एक मुल्क है, मुल्क जैसा मुल्क.. बाकी मुल्कों जैसा लेकिन, कुछ अलहदा कुछ ज्यादा। ज्यादा इस कदर, कि एक लाल डोरी जो खिंची है सीमा पर.. चमकती है बदस्तूर सियासतदानों की आँख में भी, यह लाल डोरी.. प्राण डोरी भी है राजनीति की, दलों की.. सियासतदानों की। मुल्कों में […]

अंतरराष्ट्रीय `मातृभाषा दिवस` के अवसर पर कोलकाता में जुटे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की यह सम्मिलित आवाज थी-‘हिन्दी बचाओ मंच’ की ओर से ऐतिहासिक कॉलेज स्क्वायर स्थित विद्यासागर पार्क के मुख्य द्वार पर। कलकत्ता विश्वविद्यालय के सामने भोजपुरी और राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग और मनोज तिवारी सहित कुछ […]

फिल्में सामान्य जीवन पर जल्दी असर करती हैं सामाजिक जीवन में, वैसे फिल्मों में काम करने वालों की कार्यशैली ऐसी ही है कि,वो एक प्रकार के उच्च व्यवसायिक तरह का जीवन जीते हैं। ऐसे में इनसे अच्छे संस्कार की उम्मीद बेइमानी है,यानी न के बराबर। सरकार (अधिकारियों )और नेताओं को […]

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केसरिया कुसुमशोभित वाटिका है यहाँ, वसंत इठलाकर अब तुम चले कहाँ ? वासंती चुनर ओढ़े प्रमिल ऋतु खिली यहाँ, प्रणय के पल संग लिए अब तुम चले कहाँ ? प्रीत की स्वरलहरियों पर गूँजा निनाद करती यहाँ, मधुर रुनझुन गीत नुपुर के लिए अब तुम चले कहाँ ? तनिक ठहरो […]

मैं किस हद तक जाउंगा, ये खुद नहीं जानता, किस मोड़ और रास्ते से जाउंगा,नहीं जानता। आने और जाने से क्या फर्क पड़ेगा किसी को, आवाज की दुनिया में किसी को नहीं जानता। परदा नहीं किसी से,जो मुँह फेर लूँगा बातों से, किसी से क्या गिला और शिकवा,नहीं जानता। दूर […]

सुबह की चाय के साथ ज्यों ही अखबार खोलकर बैठी,एक मन्द-सी मुस्कान अनायास ही मेरे चेहरे पर बिखर गई। पूरा अखबार डिस्काउन्ट सेल के विज्ञापनों से भरा पड़ा था..और हो भी क्यों नहीं,आखिर महिला दिवस (‘वूमन्स-डे’)जो था। इस तरह के क्षणिक आकर्षण ही तो ऐसे ‘डे’ के पर्याय बनते जा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।