बहुत उलझन में हूँ!रस्ते भटक रहे है अब!कंकड़ियां सवाल कर रही मुझसेजवाब किसी गुफ़ा में चले गए हैनदी में समुद्र कूद रहा है मौन सापौधे पेड़ो से करते है चतुराईबहुत उलझन में हूँ!रस्ते भटक रहे है अब!शोर ने ताला लगा दिया मौन परउलझने दिमाग से करे शिकायतवहस ज़िन्दा निगल रही […]
