कौआ काला-काला | खोल लिया इसने अक्ल का ताला ||     काँव-काँव का राग सुनाता | पर कभी न धोखा खाता ||        कौआ काला-काला | इसका बड़ा बोलबाला || छत की मुंडेर पर काँव-काँव बोले | चुन्नू-मुन्नू के मन में मिश्री घोले ||        प्यारे-प्यारे मामा आयेंगे | चना-रेबडीं […]

स्वस्थ और अस्वस्थ के दो पहियों में पिस रहा है इंसान, एक तरफ भगवान है एक तरफ शैतान। उस रचनाकार की रचना देखो जिसने बनाया है इंसान करे है काम ऐसे ऐसे कर दिया जंगल बाग बगीचों को वीरान नदी नालों को भी न छोड़ा कैसे कमाये पैसे वो इसी […]

आज क्या हुआ पता नहीं रात का एक भी कब की बज चूका था। इतनी मिन्नतें करने के बावजूद कोई भी आत्मा हमारे प्लेंचेट आने तैयार नहीं थी।  मेरे अलावा मेरे तीन मित्र भी मेरे साथ ही परेशान थे। खैर , मै तो प्लेंचेट से बहुत अच्छी तरह परिचित था।  […]

याद है क्या अभी भी तुमको, वो पहली मुलाकात, जब टकराये थे हम दोनों इत्तेफाक से उस रात, याद है क्या अभी भी तुमको,पहली दफा जब भीगें थे साथ-साथ, वह बिजली की चमक,तेेेज गड़गड़ाहट और मद्धम सी बरसात, याद है क्या अभी भी तुमको,जब पहली बार थामा था मेरा हाथ, […]

संक्रांति त्योहार तीर्थ पुण्य दान। दानी देते तिल गुड भोजन दान।। पशुओं को खिलाकर चारा दान। अतिथि देवो भव: गृह की शान।। यज्ञ अग्नि में करते समिधा दान। पुरोहितों को देते प्रिय वस्तु दान।। कर्ण ने रखा अतिथि पुरंदर मान। इंद्र को दिए कवच  कुण्डल दान।। राजा ने दिया बूढ़ी […]

जगत अपने काम काज निपटा कर ट्रेन पकड़ चुका था।आज वह पिछले छः महीने बाद अपने गाँव लौट रहा था।यहाँ परदेश में कमाकर वो गाँव में खेती करता था।अभी बरसात के सीजन चल रहे थे। इसलिए वो खेतों के बारे में सोचता हुआ ट्रेन में झपकी ले रहा था।उसके साथ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।